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प्रसूता और उसके पति को बस चालक ने आधे रस्ते उतारा, सड़क पर गूंजी किलकारियां

  • संकट में नागपुर में सड़क किनारे हुई कन्या रत्न की प्राप्ति

  • जाजपुर के जिलाधिकारी ने भी फोन पर मदद करने से किया इनकार

  • ओडिशा लौटने में हो रही समस्या के कारण दंपत्ति ने मुख्यमंत्री से मांगी मदद

  • जब कोई नहीं मिला तो मीडिया को बनाया संदेशवाहक

फाइल फोटो

भुवनेश्वर. कोरोना वायरस के संकट के समय में गुजरात के सूरत से लौट रहे एक जोड़े के लिए ओडिशा का सफर परेशानी का सफर बन गया. प्रसव पीड़ा होने पर बस चालक ने प्रसूता को आधे रास्ते में उतार दिया और संकट के समय सड़क किनारे एक कन्यारत्न की प्राप्ति हुई.

जानकारी के मुताबिक, एक बस में भद्रक जिले का एक आदमी और उसकी गर्भवती पत्नी सूरत से यात्रा कर रहे थे. आधे रास्ते में प्रसव पीड़ा होने पर दंपती को नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के पास बीच में छोड़ दिया गया. मजदूर ने बताया कि जब मैंने बस कर्मचारियों को सूचित किया कि मेरी पत्नी का प्रसव चल रहा है, तो उन्होंने हमें नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के पास वाहन से उतरने के लिए कहा. बस स्टाफ और सह-यात्रियों ने कहा कि वे हमारे लिए इंतजार नहीं कर सकते. वाहन ने हमें आधे रास्ते में छोड़कर ओडिशा के लिए प्रस्थान कर गये.

बाद में किसी तरह उस मजदूर ने स्थानीय लोगों की मदद ली. सड़क के किनारे एक बच्ची ने जन्म लिया. इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से पत्नी को उसने नागपुर से लगभग 15-20 किलोमीटर दूर स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया. मजदूर ने अपने एक रिश्तेदार के जरिए जाजपुर कलेक्टर का संपर्क नंबर प्राप्त किया और अपनी परेशानी बताई, लेकिन कलेक्टर ने मुझे बताया कि वह किसी भी तरह से मेरी मदद नहीं कर सकते हैं और मुझे उस क्षेत्र के प्रशासन से संपर्क करने के लिए कहा जहां मैं फंसे हुए हूं.

मजदूर ने कहा कि मेरे पास खुद को या अपनी पत्नी को खिलाने के लिए पैसे नहीं हैं. मैं मीडिया के माध्यम से ओडिशा के मुख्यमंत्री से अनुरोध करता हूं कि कृपया वह इस मामले में हस्तक्षेप करें और हमें बचाएं.

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