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38 गांवों के आदिवासी लोगों ने सुनाया अपना फैसला
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कहा-माओवादी समर्थक करार देकर झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है हमें
रायगड़ा। जिले के नियामगिरी इलाके में रहने वाली देश की आदिम जनजातियों में से एक डोंगरिया कोंध ने बुनियादी सुविधाओं और कथित झूठे मामलों को वापस लेने की मांग को लेकर आगामी चुनावों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। वे मालीगुड़ा, नियामगिरि और माली पर्वत में खदानों के पट्टे पर भी नाराज हैं।
खबरों के अनुसार, कल्याणसिंहपुर पुलिस सीमा के तहत 38 गांवों से आए डोंगरिया परसाली में एकत्र हुए और मतदान का बहिष्कार करने का फैसला किया।
इन लोगों ने कहा कि वे लंबे समय से जल, जंगल और जमीन पर अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन उनमें से कई को माओवादी समर्थक करार दिया जा रहा है और झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है, जिसके लिए उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
आदिवासियों ने ऐसे झूठे मुकदमों को खत्म करने की मांग की। विभिन्न मुद्दों पर अपनी नाखुशी व्यक्त करते हुए एक स्थानीय निवासी कृष्णा सिकाका ने कहा कि डोंगरिया के खिलाफ माओवाद से संबंधित झूठे मामले दर्ज किए गए हैं। इसलिए हमें परेशान किया जा रहा है। ऐसे मामलों को वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, मालीगुड़ा, नियामगिरि और माली पर्वत में विभिन्न खदानें पट्टे पर दी गई हैं। हम इन खदानों के पट्टे तत्काल रद्द करने की मांग करते हैं।
लोगों ने यह भी कहा कि वर्षों से ग्रामीणों की उपेक्षा की गई है, क्योंकि वे अभी भी सुरक्षित पेयजल, संचारी सड़कें, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
उन्होंने अपने बुनियादी मुद्दों का समाधान होने तक चुनाव में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है।
कृष्णा सिकाका ने यह भी कहा कि चूंकि ऐसे सभी मुद्दों का वर्षों से समाधान नहीं हुआ है और हमारी लंबे समय से लंबित मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया है, इसलिए हमने आगामी चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग करने से परहेज करने का फैसला किया है।
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