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भुवनेश्वर में सामान्य रहा जनजीवन
भुवनेश्वर। कई ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत देशव्यापी बंद ओडिशा में लगभग बेअसर रहा। बहुत लोगों को पता भी नहीं था कि आज शुक्रवार को भारत बंद ओडिशा में भी होगा। शुक्रवार को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक बंद का आह्वान किया गया था।
बंद से आपातकालीन सेवाएं जैसे एम्बुलेंस संचालन, समाचार पत्र वितरण, मेडिकल दुकानें और बोर्ड परीक्षा के लिए जाने वाले छात्रों को दूर रखा गया था। इस आह्वान पर ओडिशा में, विशेषकर भुवनेश्वर में प्रभाव लगभग शून्य था। बंद के दौरान वाहनों की सामान्य आवाजाही देखी गयी। यहां तक कि ट्रेनें भी तय समय के अनुसार चल रही हैं। हालांकि बंद के तहत ट्रेड यूनियनों ने सुबह 11:30 बजे भुवनेश्वर में रैली निकाली।
बंद के बारे में ट्रेड यूनियन नेता महेंद्र परिदा ने सुबह कहा था कि हमें ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों, योजना श्रमिकों और परिवहन श्रमिकों का भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। यहां तक कि शहरी इलाकों में भी हमें वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए नहीं कहा गया है। हम सिर्फ केंद्र सरकार के कार्यालयों के सामने विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं। बंद निश्चित रूप से सफल होगा।
हालांकि बंद का कुछ असर अनुगूल और राउरकेला जैसे औद्योगिक शहरों में देखा गया। इसके दौरान राउरकेला में बसों की आवाजाही रोकने तथा अनुगूल व तालचेर के पास खदानें बंद करने की खबर है।
आंदोलनकारी किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने बिजली संशोधन विधेयक 2020 को रद्द करने का भी आग्रह किया है। साथ ही इसे खेती से जोड़ते हुए प्रति वर्ष 200 दिन का रोजगार और मनरेगा के तहत 700 रुपये की दैनिक मजदूरी प्रदान करने की अपील भी किसानों द्वारा की गई है।
इसके अलावा, किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान इस दौरान मारे गए किसानों के परिवारों के लिए मुआवजे, दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेने तथा भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की बहाली की मांग कर रहे हैं।
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