भुवनेश्वर। भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) ने एक बार फिर त्योहारी सीजन से पहले राजधानी को भिखारी मुक्त करने का फैसला किया है। बीएमसी कमिश्नर विजय अमृत कुलांगे की अध्यक्षता में हुई एक विशेष बैठक में इस संबंध में फैसला लिया गया है।
फैसले के मुताबिक, अब भिखारी भुवनेश्वर में सड़क किनारे या मंदिरों के सामने भीख नहीं मांगेंगे। भिखारी मुक्त शहर सुनिश्चित करने के लिए तीन विशेष दस्ते बनाए गए हैं।
इन दस्तों में जेडडीसी के सदस्य, जोनल सीओ, सीएमएमयू प्रबंधक, विभिन्न एजेंसियां, पुलिस और अन्य अधिकारी शामिल हैं। बताया गया है कि यदि कोई भिखारी सड़क किनारे भीख मांगते हुए पाया गया, तो दस्ता उसे पकड़ लेगा। त्योहारों के दौरान मंदिरों और पूजा स्थलों पर भीख मांगने की गतिविधियों की जांच करने के लिए दस्ता नियमित रूप से अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले क्षेत्रों का दौरा करेगा।
भिखारियों को बीएमसी के पांच पुनर्वास केंद्र में रखा जाएगा। बीएमसी के वर्तमान में पांच पुनर्वास केंद्र हैं, जो रंग बाजार, अंधारुआ, पीडब्ल्यूडी कॉलोनी, डाक्कुआ और नीलाद्रि विहार में स्थित हैं। बताया जाता है कि राजधानी में नागरिकों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रत्येक पुनर्वास केंद्र में 100 से अधिक भिखारियों को रखा जा सकता है।
इसके अलावा, कुछ भिखारियों को उनके परिवार के सदस्यों से चर्चा के बाद उनके परिवार के पास भेजा गया है। बीएमसी ने चेतावनी दी है कि अगर कोई परिवार किसी छोड़े गए व्यक्ति को दोबारा भीख मांगने के लिए भेजता है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि बीएमसी पिछले कुछ सालों से भुवनेश्वर को भिखारी मुक्त बनाने की योजना बना रही है। हालांकि, बीएमसी की योजना अभी तक मूर्त रूप नहीं ले पाई है।
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