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नुआखाई के कारण विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव टला

  • अब 21 की जगह 22 सितंबर होगा चुनाव

  • विपक्ष की बहिष्कार की घोषणा के बाद राज्य सरकार ने उठाया कदम

भुवनेश्वर। राज्य सरकार ने 21 सितंबर को होने वाले ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव टाल दिया है। अब यह चुनाव 22 सितंबर को होगा। राज्य में विपक्षी दल भाजपा और कांग्रेस ने नुआखाई का हवाला देते हुए 21 सितंबर को होने वाले चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा की थी। अब पश्चिमी ओडिशा में नुआखाई उत्सव के मद्देनजर सरकार ने विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव 22 सितंबर को पुनर्निर्धारित किया है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों ने हाल ही में 21 सितंबर को स्पीकर चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा करते हुए कहा था कि चुनाव ओडिशा के पश्चिमी हिस्से में मनाए जाने वाले कृषि त्योहार नुआखाई त्योहार के दिन हो रहा है। उन्होंने बीजद सरकार पर राज्य के पश्चिमी क्षेत्र के लोगों के प्रति सौतेला रवैया अपनाने का आरोप लगाया। भाजपा विधायक नौरी नायक ने एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि बीजद सरकार को पश्चिमी ओडिशा के लोगों की भावनाओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने कहा कि था कि नुआखाई उत्सव के एक दिन बाद पश्चिमी ओडिशा के विधायकों के लिए ओडिशा विधानसभा में पहुंचना संभव नहीं है। नुआखाई के अगले दिन को भेंटघाट के रूप में मनाया जाता है। नायक ने कहा कि हमने चुनाव की तारीख टालने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

इससे पहले, कांग्रेस विधायक दल के नेता नरसिंह मिश्र ने घोषणा की थी कि उनकी पार्टी के विधायक नुआखाई उत्सव के कारण चुनाव प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने भी कहा था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने 21 सितंबर को स्पीकर चुनाव कराने का फैसला किया। कांग्रेस विधायक उस दिन स्पीकर चुनाव में शामिल नहीं हो पाएंगे। यह पश्चिमी ओडिशा के प्रति सौतेला रवैया है।

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