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श्री मंदिर के पशुपालक सेवायतों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने का आरोप
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भगवान भरोसे आयोजित किए सेवा कार्य
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मौके पर मौजूद श्रीमंदिर की पुलिस भी रही मूकदर्शक

विष्णुदत्त दास, पुरी
पुरी जगन्नाथ बल्लभ मठ में भगवान जी की दयणा चोरी नीति संपन्न हो गयी, लेकिन इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान नहीं दिया गया. हालांकि इस दौरान वहां पर श्रीमंदिर प्रशासन की पुलिस भी मौजूद थी, लेकिन उसने भी कोरोना महामारी के विस्तार को रोकने के लिए सरकार के सोशल डिस्टेंसिंग के आदेश का पालन करना उचित नहीं समझा. यह पूरा आयोजन भगवान के भरोसे हुआ.
उल्लेखनीय है कि श्री मंदिर की अनोखी परंपरा है दयणा चोरी नीति. श्री मंदिर से श्रीजिव को बीजे करने के बाद जगन्नाथ वल्लभ मठ परिसर में पहुंचने पर दयाणा समर्पण किया जाता है. इसके बाद दो दयणा पौधे लेकर श्री मंदिर आने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस कार्य को दयणा चोरी नीति कहा जाता है. इस सेवा कार्य को पशुपालक सेवायत करते हैं. इनको पति महापात्र सेवायत सहयोग करते हैं. इन सभी परंपरा के अनुसार जगन्नाथ वल्लभ मठ में यह नीति किये जाने के बाद श्री मंदिर में भगवान जी को विराजित किया गया.
इस नीति के आयोजन के दौरान राज्य सरकार के आदेशों का पालन नहीं किया गया. राज्य समेत पूरी दुनिया में कोरोना के विस्तार को रोकने के लिए सामाजिक दूराव का पालन किया जा रहा है. राज्य सरकार ने सामाजिक दूराव को सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन को सौंपी है, लेकिन यहां पुलिस चुप रही. सभी सेवायत लगभग एक-दूसरे से सटे हुए थे. पांच फीट की दूरी कहीं भी नहीं दिखी, जबकि वर्तमान समय में एक दूसरे व्यक्ति के सामाजिक दूरी रखने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन यह आध्यात्मिक कार्य संपन्न कराते समय पहले की तरह ही भगवान पर भरोसा करते हुए इन सेवारत पुजारियों ने आपस में सामाजिक दूरियां नहीं रखीं. इन दृश्य को देखने वाले लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं. श्री मंदिर प्रशासन की पुलिस की चुप्पी पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं.
श्रीमंदिर के बाद महाप्रसाद पाने के लिए श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

श्री जगन्नाथ मंदिर में पहले की तरह महाप्रसाद पाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी दिखाई दी. श्री मंदिर के उत्तर द्वार पर काफी संख्या में श्रद्धालु महाप्रसाद लेने के लिए पहुंचे. हालांकि श्रीमंदिर में किसी को अंदर जाने के लिए अनुमति नहीं है. आज मंगलवार को महिलाएं पुरी में मंगला माता की उपवास करती हैं. इस परंपरा के अनुसार आज इस चैत्र महीने की अंतिम मंगलवार को महाप्रसाद भोजन के लिए दोपहर में यह भीड़ उमड़ पड़ी. श्री मंदिर से महाप्रसाद बाहर लाकर श्रद्धालुओं को दिया गया.
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