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लोगों की सेवा के लिए डॉक्टरों के मन में संवेदनशीलता होनी चाहिए – राष्ट्रपति

  •  कहा- डॉक्टरी एक वृत्ति नहीं, बल्कि एक व्रत है

भुवनेश्वर। गांव में डॉक्टर, वकील व शिक्षक को लोग भगवान मानते हैं। डॉक्टर निष्ठा के साथ लोगों की सेवा कर मरीजों को स्वस्थ कर सकते हैं। हमने भगवान को नहीं देखा, लेकिन डॉक्टर अपनी सेवा के बल पर मरीजों को ठीक करते हैं। सेवा के प्रति रुचि व आग्रह न होने पर कोई डॉक्टर अच्छा डॉक्टर नहीं बन सकता। इसलिए सेवा हेतु डॉक्टरों के मन में संवेदनशीलता होनी चाहिए। कटक के श्रीरामचंद्र भंज मेडिकल कालेज व अस्पताल के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल होकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ये बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि डॉक्टरी एक वृत्ति नहीं है, बल्कि एक व्रत है। भारतीय संस्कृति में नर सेवा को नारायण सेवा माना जाता है।

उहोंने कहा कि लोगों के कष्ट को दूर करना डॉक्टरों का बड़ा काम है। भारत के मुनि ऋषियों ने कहा है कि दुःखी लोगों की सेवा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है। मातृ व शिशु मृत्युदर में कमी आयी है। डाक्टरों के प्रयास के कारण यह संभव हो सका है।

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