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नीति आयोग नेशनल मल्टी डाइमेन्शनल पॉवर्टी इंडेक्स प्रोग्रेस रिपोर्ट का दिया हवाला
भुवनेश्वर। प्रचार प्रसार व बड़े-बड़े होर्डिंग लगा देने से किसी भी योजना को सफलता नहीं मिलती। इसके लिए लोगों के पास योजना को पहुंचाना पड़ता है। लगातार 23 साल शासन में रहने के बाद भी ओडिशा सरकार अपनी स्वयं की योजनाओं के साथ-साथ केन्द्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में विफल रही है। नीति आयोग द्वारा सोमवार को जारी नीति आयोग नेशनल मल्टी डाइमेन्शनल पवर्टी इंडेक्स प्रोग्रेस रिपोर्ट ने इस बात को प्रमाणित कर दिया है। भाजपा के प्रवक्ता सत्यव्रत पंडा ने पार्टी कार्यालय में एक पत्रकार सम्मेलन में ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि विकास के संबंध में राज्य सरकार जिस ढंग का प्रचार कर रही है, उसका पोल खुल गया है। मुख्यमंत्री के नाम लेकर उनके व्यक्तिगत सहायक के पूरे राज्य का दौरा करने से कुछ नहीं होता। इस रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के प्रशासन को दीमक लग चुका है।
उन्होंने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरीब कल्याण योजना के दीर्घ सूत्री प्रभाव को स्पष्ट किया है। अब तक कुल 13 करोड़ 50 लाख से अधिक लोग गरीबी की रेखा से बाहर आये हैं। प्रधाममंत्री का स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, पोषण अभियान, समग्र शिक्षा, सौभाग्य, उज्ज्वला, जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे क्रांतिकारी योजनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
लेकिन दुःखद बात यह है कि गरीबी उन्मूलन के राज्यों की सूची में बड़े राज्यों में ओडिशा नीचे से सातवें स्थान पर स्थिर है। ओडिशा के जनजातीय जिलों की स्थिति और खराब है। रिपोर्ट राज्य सरकार के जनजाति विरोधी प्रशासन होने की बात को प्रमाणित कर रही है।
Posted by: Desk, Indo Asian Times
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