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आर्थिक अपराध शाखा एक आरोपी को कर चुकी है गिरफ्तार
भुवनेश्वर। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने आज बुधवार को ऑनलाइन पोंजी कंपनी ‘क्लाउड-फुट’ के 53.48 लाख रुपये फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पूरी जमी हुई रकम सात खातों में थी। इस मामले में ईओडब्ल्यू ने पहले एक आरोपी नीलेश कर को गिरफ्तार किया था। कर को बालेश्वर जिले के सहदेवखुंटा इलाके के निवासी महामान्य जेना द्वारा दायर शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि कर ने अतिरिक्त पैसे कमाने के लिए उसे एक ऐप व वेबसाइट ‘क्लाउड-फुट’ में निवेश करने के लिए प्रेरित किया था।
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने कहा कि शिकायतकर्ता ने जनवरी से मार्च, 2023 के बीच 2,13,038 रुपये का निवेश किया था।
ईओडब्ल्यू ने एक विज्ञप्ति में कहा कि जब ‘क्लाउड-फुट’ के वॉलेट में दिखाया गया कि उन्हें अपनी निवेशित राशि पर 50,57,117 रुपये मिलने हैं, वैसे अचानक वेबसाइट ने काम करना बंद कर दिया और निवेशक राशि नहीं निकाल सका। बताया गया है कि ‘क्लाउड-फ़ुट’ एक ऑनलाइन एपीपी या लिंक्ड आधारित कंपनी है जो एक बड़ी पोंजी या एमएलएम स्कीम चला रही थी और धोखाधड़ी से एक क्रिप्टो माइनिंग कंपनी होने का दावा कर रही है।
इसने खुद को कुछ रिचर्ड परसेल के नेतृत्व वाली यूएसए आधारित कंपनी होने का दावा किया था। इसने निवेशकों का विश्वास हासिल करने के लिए आरबीआई के फर्जी प्रमाणपत्र भी पेश किए। यह भी दावा किया गया कि भारत सरकार ने “क्लाउड फुट” के साथ 10 साल का करार किया है।
देश भर में 80,000 से अधिक निवेशकों को बहुत कम समय में अपने धन को कई गुना बढ़ाने का वादा करके ठगा गया था। कम से कम 200 निवेशक अकेले बालेश्वर जिले से हैं।
यह मुख्य रूप से टेलीग्राम चैनल और व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से चल रहा था।
ईओडब्ल्यू विज्ञप्ति में कहा गया है कि ‘क्लाउड-फुट’ का पूरे भारत में प्रभाव है और इसने क्रिप्टो माइनिंग के नाम पर पूरे भारत में लाखों लोगों को धोखा दिया है। यह वास्तव में क्रिप्टो माइनिंग के नाम पर ऑनलाइन पोंजी घोटाला चला रही है।
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