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पूछा – विवाद के समाधान के लिए क्या कदम उठाया है, स्पष्ट करें
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एक माह के अंदर इस समस्या का समाधान न होने पर सड़कों पर उतरने का ऐलान
भुवनेश्वर। कोटिया सीमा विवाद को लेकर ओडिशा सरकार कतई गंभीर नहीं है। कोटिया में आंध्र प्रदेश के मंत्री व प्रशासनिक अधिकारी बार-बार अनुप्रवेश कर रहे हैं, जबकि ओडिशा सरकार चुप्प बैठी हुई है। कोरापुट जिले के कोटिया के 21 गांवों के साथ-साथ गजपति जिले के दो पंचायतों में भी समान स्थिति है। इन इलाकों में आंध्र प्रदेश सरकार अपनी सरकारी योजना चला रही है, जबकि ओडिशा सरकार अपनी योजनाओं का क्रियान्वयन करने में किसी प्रकार की रुचि नहीं दिखा रही है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कोटिया विवाद के समाधान के लिए कौन से कदम उठाया है, उसे स्पष्ट करें। ये बातें भाजपा के प्रदेश महामंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहीं।
हरिचंदन ने कहा कि मंगलवार को आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने कोटिया का दौरा किया। वहां जगन मोहन जिंदाबाद के नारे भी लगे। केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के खिलाफ भी बातें कहीं गईं, लेकिन इस मामले में सत्तारुढ़ बीजद व सरकार अभी तक चुप्प है। इस मामले में किसी प्रकार का बयान आया नहीं है।
उन्होंने कहा कि पिछले उत्कल दिवस के अवसर पर केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान कोटिया गये थे। उस दौरान वहां उन्होंने आंध्र प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों को देखने के बाद गो बैक का नारा दिया था। तब बीजद ने केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान की आलोचना की थी, लेकिन जब अब आंध्र सरकार के उपमुख्यमंत्री कोटिया का दौरा कर रहे हैं, तो बीजद अपना मुंह क्यों नहीं खोल रही है। बीजद व राज्य सरकार का कोटिया के संबंध में रुख क्या है, यह स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कोटिया में आध्र प्रदेश के मंत्री व सरकारी अधिकारी लगातार आ रहे हैं, लेकिन ओडिशा सरकार के मंत्री या अधिकारी वहां नहीं जा रहे हैं। इससे ओडिशा सरकार इस मुद्दे को लेकर कितना गंभीर है, वह स्पष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में यदि राज्य सरकार कुछ नहीं करती, तो भाजपा इसके खिलाफ आंदोलन करेगी।
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