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विशिष्ट आध्यात्मिक गुरु स्वामी असीमानंद सरस्वती नहीं रहे

  • राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े थे

भुवनेश्वर। राज्य के विशिष्ट आध्यात्मिक गुरु स्वामी असीमानंद सरस्वती महाराज का आज कटक के चहटा स्थित राम मंदिर परिसर में देहांत हो गया। वह 88 साल के थे। स्वामी असीमानंद सरस्वती एक आध्यात्मिक गुरु होने के साथ-साथ एक समाज सुधारक भी थे। उन्होंने स्वामी निगमानंद सरस्वती के पदचिह्नों पर चलते हुए शंकराचार्य से संन्यास की दीक्षा ली थी। वह विश्व हिंदू परिषद के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य भी थे। 90 के दशक में अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन से भी वह जुड़े रहे थे।

उनके संपादन में एक लोकप्रिय धार्मिक पत्रिका का भी प्रकाशन हो रहा था। इसके साथ-साथ अनेक संस्थानों से भी जुड़े हुए थे। उनके निधन से समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने शोक व्यक्त किया है। स्वामी असीमानंद सरस्वती को अंतिम दर्शन करने के लिए अनेक व्यक्ति मंदिर परिसर में पहुंचे।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने शोक व्यक्त किया

स्वामी असीमानंद सरस्वती के निधन पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य तथा श्रीराम जन्म आंदोलन के सक्रिय योद्धा पूज्य स्वामी असीमानंद सरस्वती के निधन का समाचार सुनकर वह दुःखी है। सामाजिक संस्कार की दिशा में उनके प्रयास हमेशा याद किए जाएंगे। उनकी अमर आत्मा की सद्गति की कामना करता हूं।

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