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अनूठी रही आकाश इंस्टीट्यूट की होली : रंग-गुलाल के बदले हल्दी, चंदन एवं रोली का हुआ प्रयोग
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रंगारंग कार्यक्रम के बीच फ्रेंड्स ग्रुप ने खेली फुलों की होली

भुवनेश्वर -कोरोना वायरस के खौफ का सीधा सीधा असर इस साल रंग गुलाल व हुड़दंग के महापर्व होली में देखने को मिला है। सावधानी के तौर पर कई संगठनों ने एक तरफ जहां अपने सामूहिक होली महोत्सव को रद्द कर दिया था, तो वहीं दुसरी तरफ लोग भी इस बार होली में ऐहतियात बरतते नजर आए। हालांकि इन सबके बावजूद होली उत्सव को विभिन्न संगठन एवं लोगों ने होली खेलने का अलग-अलग तरीका भी निकाला और रंग-गुलाल के बजाय फूलों की होली खेली। आकाश इंस्टीट्यूट की तरफ से इस बार होली खेलने का नायाब तरीका निकाला गया। हल्दी, चंदन एवं रोली का कलर बनाकर रंग-गुलाल की जगह पर प्रयोग किया गया। रंगारंग कार्यक्रम में आकाश परिवार के सदस्यों ने समाज के अपने कुछ स्नेहजनों के साथ जमकर होली उत्सव का आनंद लिया। होली की गीतों पर ठुमके लगाए और स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया।

इस अवसर पर आकाश इंस्टीट्यूट के निदेशक डा. ए.बी.सिंह ने बताया कि कोरोना वायरस का खौफ लोगों में व्याप्त होने से हमने यह तरीका निकाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक एवं शैक्षिक संस्थान ही समाज के लिए आइने का काम करते हैं। ऐसे में हल्दी, चंदन एवं रोली के पेस्ट बनाकर लोगों को लगाया गया जो लोगों को भी खूब पसंद आया है। हल्दी और चंदन एंटीबायोटिक भी होता है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने होली की गीतों पर जमकर ठुमके लगाए। समारोह में आकाश परिवार के साथ स्नेही मित्र एवं उनके परिवार के सदस्यों ने भी भाग लिया और इस उत्सव के साथ स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया।
उसी तरह से तेरापंथ भवन में फ्रेंड्स ग्रुप की तरफ से राजस्थानी माहौल में फूलों की होली खेली गई। इस अवसर पर राजस्थान जयपुर से आए मीना सपेरा डांस ग्रुप द्वारा राजस्थानी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया गया। लोगों ने एक-दूसरे पर नाना प्रकार के फूल को रंग-गुलाल के तौर पर प्रयोग किया और नृत्यगीत करते हुए होली उत्सव का आनंद लिया। केशरिया ठंडाई, हाईटी व स्वरुचि भोज की भी व्यवस्था की गई थी। समारोह को सफल बनाने में प्रकाश भुरा, घनश्याम पेड़ीवाल, नवरतन बोथरा एवं अन्य तमाम वरिष्ठ सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा राजधानी में कई जगहों पर होली उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने नृत्य-गीत के साथ होली उत्सव का आनंद लिया। हालांकि कोरोना वायरस के खौफ के कारण पिछले सालों की तुलना में होली उत्सव की धूम काफी फीकी रही।
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