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चुनाव प्रचार के अंतिम दिन झुग्गी-बस्तियों में मतदाताओं को रिझाने में जुटे दिखे उम्मीदवार
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सड़क किनारे बनाये गये शौचालय और सामूदायिक भवन बना प्रचार अभियान का हिस्सा
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पहली बार अपनी भूमिका को लेकर खुलेआम सक्रिय हुए आप्रवासी समुदाय के मतदाता
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राजधानी भुवनेश्वर और कटक में बीजद को दिया खुलेआम समर्थन
हेमन्त कुमार तिवारी, भुवनेश्वर
ओडिशा में शहरी निकाय चुनावों में झुग्गी-बस्तियां और आप्रवासी समुदाय ही उम्मीदवारों का बेड़ा पार लगायेगा. जीत में आप्रवासी लोगों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी. किसी भी उम्मीदवार के लिए जीत का द्वार यहीं से खुलने वाला है. पहली बार इस चुनाव में आप्रवासी अपनी भूमिका को लेकर खुलकर सक्रियता दिखायी है और राजधानी भुवनेश्वर और कटक के नगर निगम के चुनाव में बीजद को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है.
आज प्रचार अभियान के अंतिम झणों में उम्मीदवार झुग्गी-बस्तियों और आप्रवासी मतदाताओं को रिझाने में जुटे दिखे. कोई घूम-घूमकर प्रचार कर रहा था, कोई सोशल मीडिया के सहारे प्रचार अभियान चलाया.
कटक नगर निगम चुनाव में बीजद ने सांसद सुभाष सिंह को हिन्दीभाषी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा है. कटक के साथ-साथ राजधानी भुवनेश्वर शहर में राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और झारखंड समेत अन्य प्रदेशों के लोग काफी संख्या में रहते हैं.
भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी), कटक नगर निगम (सीएमसी), ब्रह्मपुर नगर निगम (बीएमसी) के साथ-साथ 106 नगरपालिकाओं में विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं. प्रचार अभियान के अंतिम झणों में नेता और उम्मीदवार अपना पूरा ध्यान झुग्गी-बस्तियों पर केंद्रित कर रखा. भुवनेश्वर में प्रचार के दौरान सामुदायिक भवन और सड़कों के किनारे बनाये शौचालयों को भी प्रचार अभियान का हिस्सा बनाया गया. आज शाम तक चुनाव प्रचार थम गया. इसलिए उम्मीदवारों ने इस महत्वपूर्ण समय में झुग्गीवासियों को लुभाने में जुटे दिखे. माना जाता है कि झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोग मतादन करने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. शायद यही कारण है कि झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को हमेशा सभी दलों के लिए प्राथमिक वोट बैंक माना जाता है. एक आंकड़े के अनुसार, भुवनेश्वर, कटक और ब्रह्मपुर में क्रमशः 400, लगभग 250 और लगभग 150 बस्तियां हैं.
इन झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए सभी तीनों प्रमुख राजनीतिक दल बीजद, भाजपा और कांग्रेस ने घर-घर प्रचार अभियान किया. बीजद आप्रवासी सामुख्य के संयोजक नंदलाल सिंह ने कहा कि ओडिशा में आप्रवासी लोग नतीजों को पलटने की क्षमता रखते हैं. उन्होंने बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार ओडिशा में 35 लाख से अधिक आप्रवासी मतदाता हैं. उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक दल के लिए मत काफी मायने रखता है.
उन्होंने आप्रवासी लोगों के प्रति आभार जताया कि उन्होंने कटक और भुवनेश्वर में बीजद के उम्मीदवारों को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है. भुवनेश्वर में हिन्दीभाषी, मारवाड़ी और गुजराती समेत विभिन्न अन्य भाषाभाषी लोगों के समुदायों ने अपना समर्थन देने की घोषणा की है. ठीक इसी तरह से कटक में भी ऐसे संगठनों ने भी बीजद को साथ देने का ऐलान किया है.

उल्लेखनीय है कि 24 मार्च को 1,837 वार्डों में सुबह 8:00 बजे से मतदान शुरू होगा और शाम 5 बजे तक चलेगा. 4,373 बूथों पर कुल 40,55,053 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.
ओडिशा राज्य चुनाव आयुक्त आदित्य प्रसाद पाढ़ी ने कहा कि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए राज्य भर में 195 प्लाटून पुलिस बल तैनात किया जाएगा. भुवनेश्वर, कटक और ब्रह्मपुर नगर निगमों में 60 प्लाटून पुलिस बल तैनात किया जाएगा. इसके अलावा, 300 मोबाइल पार्टियों को भी सेवा में लगाया जाएगा. आपात स्थिति के लिए प्रत्येक जिले में एक या दो पुलिस प्लाटून रिजर्व में रखी जाएगी. मतदान के प्रबंधन के लिए कुल 22,000 मतदान कर्मियों को लगाया जाएगा.

प्रत्येक बूथ में दो ईवीएम होंगी. एक मेयर और चेयरमैन के लिए और एक काउंसलर के लिए. इसी तरह प्रत्येक नगरपालिका में एक मॉडल और एक गुलाबी बूथ होगा और प्रत्येक निगम में पांच मॉडल और पांच गुलाबी बूथ होंगे. इस चुनाव में पहली बार मतदाताओं के पास ‘नोटा’ का विकल्प भी होगा. मतगणना 26 मार्च को सुबह आठ बजे से शुरू होगी.
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