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लक्षण दिखने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दी डाक्टर से संपर्क करने की सलाह
भुवनेश्वर. ओमिक्रॉन नये लक्षण सामने आने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञ जयंत पंडा ने चेतावनी दी है कि महामारी की तीसरी लहर के दौरान शरीर में दर्द के लिए मनमानी दवाओं का उपयोग करने से जटिलताएं हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन संक्रमण के मामले में शरीर में दर्द, पेट में दर्द और दस्त जैसे लक्षण आम हैं. ओमिक्रॉन लोगों को बहुत तेजी से संक्रमित कर रहा है, लेकिन अच्छी खबर यह है कि मरीज गंभीर नहीं हो रहे हैं और दूसरी लहर में संक्रमण की तुलना में तेजी से ठीक हो रहे हैं. यदि कोई लक्षण विकसित होता है, तो उसे डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए. ओमिक्रॉन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य बताते हुए पंडा ने कहा कि कोविद-19 म्यूटेंट स्ट्रेन गले में रहता है और छाती को संक्रमित नहीं करता है, और ना ही यह रोगी को गंभीर बनाता है. लक्षणों में भोजन निगलते समय गले में हल्का दर्द, नाक बंद होना, सिरदर्द और शरीर में दर्द शामिल हैं. ये लक्षण दो से तीन दिनों तक बने रहते हैं. पिछली दो लहरों की तुलना में देखा जा रहा है कि इस तीसरी लहर में मरीज ज्यादा तेजी से ठीक हो रहे हैं. पंडा ने कहा कि रोगियों को एंटीबायोटिक और एंटीवायरल जैसी दवाओं के उपयोग की आवश्यकता नहीं होती है. रोगसूचक उपचार में पेरासिटामोल या सेट्रीजीन का उपयोग शामिल है जो सर्दी और खांसी को ठीक करने के लिए निर्धारित हैं. हालांकि, अगर ऑक्सीजन का स्तर गिरता है या सीने में दर्द जैसे लक्षण हैं, तो सावधान रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि हालांकि, ऐसी संभावनाएं हैं कि एक मरीज पांच से सात दिनों में ठीक हो सकता है. उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे डॉक्टर के पर्चे के बिना दवाएं न लें क्योंकि इससे गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं. दोनों टीके की खुराक प्राप्त करने के बाद भी लापरवाही नहीं करें. कोई भी टीका किसी रोग के प्रति शत-प्रतिशत प्रतिरक्षा प्रदान नहीं कर सकता है. अगर पूरी तरह से टीका लगाया गया व्यक्ति संक्रमित हो जाता है, तो उसे तीन महीने के बाद बूस्टर या एहतियाती खुराक मिल सकती है.
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