अशोक पाण्डेय, भुवनेश्वर
पुरी गोवर्द्धन पीठ के 145वें पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्दजी सरस्वती महाराज ने उद्घोषणा की कि भारत भी अगले लगभग चार सालों में हिन्दू राष्ट्र घोषित हो जाएगा. इसके लिए गांव, पंचायत, प्रखण्ड, जिला, प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर उनके द्वारा स्थापित आदित्य वाहिनी संगठन और आनन्दवाहिनी को सुदृण किया जा रहा है. वैचारिक समानता को सुदृढ़ बनाने के लिए पाक्षिक, साप्ताहिक एवं मासिक वर्चुअल संगोष्ठियां आयोजित हो रही हैं. बुद्धिजीवी वर्ग को सचेत बनाने के लिए सत्संग एवं सेवापरायण परियोजनाएं घर-घर चलाई जा रहीं हैं. ग्रामीण स्तर पर आनन्दवाहिनी तथा आदित्यवाहिनी को मजबूत किया जा रहा है.
जगतगुरु के अनुसार, इसके लिए एक रुपये और एक घंटे का समय हर हिन्दू परिवार से निकालकर, पैसे का सदुपयोग उस गली मोहल्ले के विकास में लगे, ऐसी व्यवस्था की जा रही है. जगतगुरु के अनुसार, अगर प्रत्येक व्यक्ति-समाज यदि प्रबुद्ध होगा, तो नये भारत का निर्माण होगा. यहां पर गुरुदेव का दिव्य संदेशः एक सुसंस्कृत, सुशिक्षित, सुरक्षित, समृद्ध, सेवापरायण, स्वस् व्यक्ति तथा समाज की संरचना में विश्व मेधा-रक्षा-वाणिज्य और क्षमशक्ति का उपयोग एवं विनियोग हो, विश्व को धर्मनियंत्रित, पक्षपातविहीन-सर्व हितप्रद शासन सुलभ कराने में सत्पुरुषों की प्रीति तथा प्रवृत्ति परिलक्षित हो, सेवा और सहानुभूति के नाम पर किसी वर्ग के अस्तित्व और आदर्श को विलुप्त करने के समस्त षडयंत्र विश्वस्तर पर मानवोचित शील की सीमा की सीमा में जघन्य अपराध घोषित हो, विकास के नाम पर प्रयावरण को विकृत और विलुप्त करनेवाले समस्त प्रकल्प निरस्त हों, स्थावर, जंगम प्राणियों के हितों में पाश्चात जगत विनियुक्त हो, पर जोर दिया जा रहा है. गुरुदेव के अनुसार, पृथ्वी, पानी, प्रकाश, पवन और आकाश सर्व शांतिप्रद और सुखप्रद हो, हाल ही में संपन्न अन्तर्राष्ट्रीय वेबीनार में आदित्य वाहिनी के 52 देशों से कुल लगभग 204 बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया.
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