भुवनेश्वर. कोरोना के कारण परीक्षा न हो पाने से राज्य में इस बार अधिक संख्या में बच्चे उत्तीर्ण हुए हैं. ऐसे में राज्य सरकार ने सीटों की संख्या बढ़ाने की घोषणा की है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का मानना है कि महाविद्यालयों के अवसंरचना व अघ्यापकों की संख्या को देखकर राज्य सरकार को निर्णय लेना चाहिए.
परिषद के प्रदेश मंत्री सौभाग्य मोहंती ने कहा कि इस बार दसवीं की परीक्षा में 5 लाख 62 हजार से अधिक छात्र छात्राएं उत्तीर्ण हुए हैं. लेकिन प्लस-2 की सीटें 4 लाख 43 हजार है. इस कारण सरकार ने सीटें बढ़ाने की बात घोषणा की है.
उन्होंने कहा कि इससे पहले किसी भी महाविद्यालय में सीट बढ़ाने के लिए पहले एक विशेष टीम उस महाविद्यालय में जाकर वहां अध्यापकों की संख्या, लाइब्रेरी आदि के बारे में जानकारी लेती थी और उसके बाद इस बारे में निर्णय किया जाता था. कुछ निजी महाविद्यालयों में अध्यापकों की संख्या काफी कम है. ऐसे में यदि इस बारे में विचार न कर सीटें बढ़ाने की अनुमति दी जाती है, तो यह शिक्षा क्षेत्र के लिए घातक सिद्ध हो सकता है. इससे यह बात भी प्रमाणित होगी कि राज्य सरकार शिक्षा के व्यवसायीकरण कर रही है.
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