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केंद्रीय योजनाओं व वित्तीय भ्रष्टाचार को लेकर साधा निशाना
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बोले- पहले एक रुपये में लाभार्थी तक पहुंचते थे सिर्फ 15 पैसे
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डिजिटल सेवाओं और जनधन खातों को बताया सुशासन की मजबूत नींव
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कहा-अब सरकारी सहायता का पूरा पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रहा है
भुवनेश्वर। ओडिशा की धरती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी धन के इस्तेमाल और वित्तीय पारदर्शिता के मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए एक रुपये में से लाभार्थियों तक केवल 15 पैसे पहुंचने की बात कही जाती थी। उन्होंने डिजिटल सेवाओं, जनधन खातों और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण व्यवस्था को सुशासन की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि आज सरकारी सहायता का पूरा पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री के इस बयान ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और तकनीक के जरिए शासन व्यवस्था में आए बदलाव को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया।
डिजिटल व्यवस्था से बदली सरकारी सहायता पहुंचाने की तस्वीर
प्रधानमंत्री ने जनधन खातों और डिजिटल भुगतान व्यवस्था की भूमिका रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाना संभव हुआ है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम करने, भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और सरकारी योजनाओं के लाभ को लक्षित लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली है।
‘एक रुपये में 15 पैसे’ से सीधे बैंक खाते तक का सफर
सरकारी धन के वितरण में कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए मोदी ने पुराने दौर की उस चर्चित टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें कहा जाता था कि केंद्र से भेजे गए एक रुपये में से केवल 15 पैसे ही आम लोगों तक पहुंचते थे। इसके विपरीत, उन्होंने मौजूदा डिजिटल व्यवस्था को सरकारी सहायता सीधे बैंक खातों में पहुंचाने वाला माध्यम बताया।
सुशासन और पारदर्शिता को बताया सरकार की प्राथमिकता
प्रधानमंत्री के संदेश का प्रमुख केंद्र यह रहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना अनावश्यक मध्यस्थता के पात्र लोगों तक पहुंचे। जनधन खाते, डिजिटल भुगतान और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसी व्यवस्थाएं इसी उद्देश्य से जुड़ी हैं। मोदी ने डिजिटल सेवाओं को प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और सरकारी सहायता के वितरण में जवाबदेही सुनिश्चित करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा बताया।
देश में लगभग 59 से 60 करोड़ जनधन खाते खुले
उन्होंने कहा कि देश में लगभग 59 से 60 करोड़ जनधन खाते खुलने से यह व्यवस्था संभव हुई है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने और बिचौलियों की भूमिका कम करने में मदद मिली है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब बिना बैंक गारंटी के भी छोटे उद्यमी, पारंपरिक कारीगर, रेहड़ी-पटरी वाले और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक सुलभ ऋण लेकर अपना काम शुरू कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से 13 करोड़ लोग पहली बार उद्यमी बने
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के माध्यम से 13 करोड़ लोग पहली बार उद्यमी बने हैं। पीएम स्वनिधि योजना ने लाखों रेहड़ी-पटरी वालों को ऋण उपलब्ध कराया है, जबकि पीएम विश्वकर्मा योजना ने पारंपरिक कारीगरों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 10 करोड़ महिलाओं को भी बैंकों से हजारों करोड़ रुपये की सहायता मिली है।
बीमा और सामाजिक सुरक्षा का हुआ विस्तार
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सामाजिक सुरक्षा का भी व्यापक विस्तार हुआ है। अटल पेंशन योजना के माध्यम से नौ करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज मिला है, जिनमें अकेले ओडिशा के लगभग 38 लाख लोग शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि एक दशक पहले बीमा गरीब और मध्यम वर्ग के लिए भी कठिन था। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना शुरू कीं।
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत 20 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर दो लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा उपलब्ध है। वहीं, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत 450 रुपये से कम वार्षिक प्रीमियम पर जीवन बीमा की सुविधा दी जाती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन दोनों योजनाओं के तहत अब तक लोगों को 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक के दावों का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने इसे सुशासन का उदाहरण बताते हुए कहा कि सरकार बिना प्रचार के जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने पर ध्यान दे रही है।
साइबर अपराधों से बैंकिंग व्यवस्था की सुरक्षा जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में बैंकिंग सेवाओं को उन लोगों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया गया, जो अब तक इससे वंचित थे। आने वाले दशक में बैंकिंग व्यवस्था को अधिक कुशल और भरोसेमंद बनाने की आवश्यकता होगी। इसमें भुवनेश्वर का नया डेटा सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि बैंकिंग व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए उसके डिजिटल बुनियादी ढांचे को भी सुरक्षित बनाना जरूरी है। इसके लिए मजबूत डेटा सेंटर और सक्षम कंप्यूटिंग सिस्टम आवश्यक हैं।
आज युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़े जाते
प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि आज युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़े जाते, बल्कि किसी देश की अर्थव्यवस्था पर हमला करके भी उसे कमजोर किया जा सकता है। भारत की आर्थिक शक्ति बढ़ने के साथ बैंकिंग प्रणाली को साइबर अपराधियों और साइबर आतंकवादियों से सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि साइबर खतरों का स्वरूप लगातार बदल रहा है। इन नई चुनौतियों का मुकाबला पुराने प्रशिक्षण तंत्र और उपकरणों से नहीं किया जा सकता। इसके लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ कुशल मानव संसाधन भी आवश्यक हैं। भुवनेश्वर में स्थापित साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ओडिशा में निवेश और युवाओं के लिए नए अवसर
प्रधानमंत्री ने कहा कि आरबीआई की नई सुविधाएं पूर्वी भारत को विकसित भारत का मजबूत विकास इंजन बनाने की दिशा में बढ़ते कदमों को दर्शाती हैं। ओडिशा में डबल इंजन सरकार बनने के बाद विकास को नई गति मिली है और राज्य की अर्थव्यवस्था प्राकृतिक संसाधनों के साथ प्रौद्योगिकी के माध्यम से भी सशक्त हो रही है।
उन्होंने कहा कि एक ओर खनिज आधारित उद्योगों का विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का नया इकोसिस्टम विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। डेटा सेंटर और एडवांस्ड कंप्यूटिंग में निवेश की संभावनाएं राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने ओडिशा के युवाओं को भरोसा दिलाया कि उनके बड़े सपनों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य खनन से लेकर माइक्रोचिप निर्माण तक विकास के नए आयाम स्थापित करने की क्षमता रखता है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने आरबीआई तथा इन परियोजनाओं से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी और विश्वास जताया कि नई सुविधाएं भारत की बैंकिंग व्यवस्था को सुरक्षित, सक्षम और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाने में योगदान देंगी।
2014 तक आधे से अधिक आबादी बैंकिंग इकोसिस्टम से ही बाहर
उन्होंने कहा कि सामान्य परिवारों को, गरीब और मिडिल क्लास को, कैसे दशकों तक अभावों में रखा गया, उसका एक बड़ा उदाहरण हमारा बैंकिंग सेक्टर भी रहा है। गरीबों के नाम पर, 60-70 के दशक में बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया। लेकिन वर्ष 2014 तक देश की आधे से अधिक आबादी बैंकिंग इकोसिस्टम से ही बाहर थी। बैंक लोन्स जैसे प्रोडक्ट तो मिडिल क्लास तक के लिए भी सपना होते थे, गरीब, छोटे किसान, भूमिहीन, बहनें-बेटियां तो इसके बारे में सोच भी नहीं सकते थे। आज भारत में डिजिटल बैंकिंग ने सबको 24 घंटे बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा है। लेकिन 2014 से पहले एक अलग ही फोन बैंकिंग का दौर था।
बड़े बदलाव के लिए सोच का भी बड़ा होना बहुत जरूरी
मोदी ने कहा कि किसी भी बड़े बदलाव के लिए सोच का भी बड़ा होना बहुत जरूरी है, नीयत साफ हो, इरादे नेक हों, तो असंभव लगने वाले काम भी संभव हो जाते हैं। जहां सोच ही छोटी हो, वहां संभावनाएं भी सीमित हो जाती हैं। बीते वर्षों में जो व्यवस्थाएं देश ने बनाई हैं, डिजिटल इंडिया का जो नया इकोसिस्टम डेवलप किया है, उसने बैंकिंग को देश के हर नागरिक तक पहुंचाया है। आज भारत का बैंकिंग सेक्टर, दुनिया के सबसे सशक्त बैंकिंग सेक्टर्स में से एक है। पहले फोन बैंकिंग से, केवल दिल्ली के खास परिवार तक पहुंच रखने वाले ही लाभार्थी थे। आज डिजिटल बैंकिंग से देश का हर परिवार लाभार्थी बना है।
डेबिट और क्रेडिट कार्ड अब सभी के लिए
ये वही देश है, जहां डेबिट और क्रेडिट कार्ड कभी अमीरों के साधन होते थे। आज देश के हर नागरिक के लिए ये सुलभ है। देश में करोड़ों रुपे क्रेडिट और डेबिट कार्ड जारी हो चुके हैं, ये आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता, दोनों का प्रतीक बना है। और ये सबकुछ आप सभी के सहयोग से संभव हो पा रहा है। आरबीआई हो, देश का हर बैंक हो, इनमें काम करने वाला एक-एक बैंक-कर्मी हो, आप सभी ने जो कार्य किया है, आप वाकई इसकी सफलता के हकदार हैं।
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