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माइंस से माइक्रोचिप्स तक नया भविष्य लिखेगा ओडिशा – मोदी

  • ओडिशा में आरबीआई के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का किया उद्घाटन

  • कहा- डिजिटल बैंकिंग ने हर परिवार तक पहुंचाई बैंकिंग सेवाएं

  • साइबर अपराधियों से वित्तीय व्यवस्था की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को भुवनेश्वर में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ये दोनों सुविधाएं भारत की बैंकिंग व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, कुशल और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत विकसित भारत का सशक्त विकास इंजन बन रहा है और ओडिशा प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा में खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार के साथ सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स का नया इकोसिस्टम विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में डेटा सेंटर और एडवांस्ड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में निवेश की नई संभावनाएं बन रही हैं, जो युवाओं के लिए रोजगार और विकास के नए अवसर खोलेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि ओडिशा ‘माइंस से माइक्रोचिप्स तक’ विकास की नई कहानी लिखेगा।

इस अवसर पर ओडिशा के राज्यपाल बृजमोहन राम, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय मंत्री जुएल ओरांव, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा तथा उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा और कनक वर्धन सिंहदेव सहित बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सुशासन का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने कहा कि भुवनेश्वर में आरबीआई की इन नई सुविधाओं का उद्घाटन इस बात का प्रमाण है कि देश में शासन की कार्यप्रणाली तेजी से बदल रही है। सरकार की प्राथमिकता विकास को व्यापक बनाना और उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश के बड़े शहरों में बड़े अस्पताल, हवाई अड्डे और संस्थान विकसित हुए, लेकिन छोटे शहरों तथा दूरदराज के क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना रहा। बेहतर इलाज के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी और अनेक गांवों में सड़क, बिजली तथा पानी जैसी सुविधाएं भी बड़ी चुनौती थीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने इस दृष्टिकोण को बदलने का प्रयास किया है। सरकार ‘प्रो-पीपल, प्रो-एक्टिव और गुड गवर्नेंस’ के मॉडल पर काम कर रही है। विकास का अर्थ भारत का संतुलित विकास है, जिसमें गांवों और छोटे शहरों को भी समान अवसर मिलें तथा दूरदराज के क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध हो।

उन्होंने कहा कि आज एक्सप्रेसवे छोटे शहरों को जोड़ रहे हैं, एम्स जैसे संस्थानों का विस्तार हो रहा है, छोटे शहरों में मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं और गांवों में लगभग पौने दो लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं। दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार भी इसी परिवर्तन का हिस्सा है। सुशासन का वास्तविक उद्देश्य नागरिकों का जीवन आसान बनाना और उनके सपनों को नए अवसर देना है।

डिजिटल बैंकिंग ने बदली देश की बैंकिंग व्यवस्था

प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों तक गरीबों और मध्यम वर्ग को बैंकिंग सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बावजूद वर्ष 2014 तक देश की आधी से अधिक आबादी बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थी। बैंक से ऋण लेना गरीबों, छोटे किसानों, भूमिहीन परिवारों और महिलाओं के लिए कठिन था।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से पहले फोन बैंकिंग के माध्यम से राजनीतिक संपर्क रखने वाले चुनिंदा लोगों को हजारों करोड़ रुपये के ऋण दिए जाते थे, जबकि सामान्य परिवारों को बैंक खाता खुलवाने के लिए भी गारंटर की जरूरत पड़ती थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था के कारण बैंकिंग प्रणाली गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के संकट में फंस गई थी।

उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के नए इकोसिस्टम ने बैंकिंग सेवाओं को देश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज डिजिटल बैंकिंग के माध्यम से लोग चौबीसों घंटे बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। पहले फोन बैंकिंग से चुनिंदा परिवारों को लाभ मिलता था, जबकि आज डिजिटल बैंकिंग ने देश के हर परिवार के लिए अवसर बढ़ाए हैं।

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