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हेलीकॉप्टर मामले में नवीन पटनायक और वीके पांडियन को राहत

  •    खुर्दा जिला एवं सत्र न्यायालय ने कथित दुरुपयोग का मामला किया खारिज

  •     साक्ष्य के अभाव और प्रक्रिया संबंधी खामियों को बताया आधार

भुवनेश्वर। पूर्व ओडिशा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और तत्कालीन 5-टी सचिव वीके पांडियन के खिलाफ सरकारी हेलीकॉप्टर के कथित दुरुपयोग को लेकर दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खुर्दा जिला एवं सत्र न्यायालय ने बुधवार को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता सुधीर चंद्र मोहंती आरोपों के समर्थन में प्रथमदृष्टया कोई अपराध स्थापित करने में विफल रहे और शिकायत दाखिल करते समय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 में निर्धारित अनिवार्य प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।

खुर्दा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने भुवनेश्वर के उप-मंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी (एसडीजेएम) द्वारा 25 मार्च 2026 को दिए गए आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं पाई। एसडीजेएम ने मूल शिकायत मामले (आईसीसी संख्या 69160/2024) को पहले ही खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ दायर आपराधिक पुनरीक्षण संख्या 171/2026 को जिला अदालत ने “गुण-दोष से रहित” मानते हुए खारिज कर दिया।

सरकारी खजाने से 500 करोड़ खर्च करने का था आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि नवीन पटनायक और वीके पांडियन ने सरकारी हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करते हुए सरकारी खजाने से करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए। पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने के बाद मोहंती ने भुवनेश्वर के एसडीजेएम न्यायालय का रुख किया था। अदालत ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी, जिसके बाद एसडीजेएम ने शिकायत में संज्ञेय अपराध का आधार नहीं पाए जाने पर उसे खारिज कर दिया।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने इस आदेश को चुनौती देते हुए खुर्दा जिला एवं सत्र न्यायालय में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।

अदालत ने साक्ष्य और प्रक्रिया को माना अहम

पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और वीके पांडियन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व महाधिवक्ता अशोक कुमार परिजा तथा अधिवक्ता सितांशु मोहन द्विवेदी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सामग्री प्रस्तुत नहीं कर सके। साथ ही शिकायत दाखिल करने से पहले बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत आवश्यक प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया।

अदालत ने बीएनएसएस की धारा 33 के तहत शिकायतकर्ता की वैधानिक पात्रता यानी लोस स्टैंडी के अभाव को भी ध्यान में रखा। अदालत के समक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त तथ्य अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा

अधिवक्ता सितांशु मोहन द्विवेदी ने कहा कि याचिकाकर्ता आरोपों के समर्थन में कोई तथ्य या प्रमाण अदालत के समक्ष नहीं रख पाए। इन परिस्थितियों में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के शिकायत खारिज करने के फैसले को सही ठहराते हुए पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।

इस आदेश के साथ जिला अदालत के स्तर पर नवीन पटनायक और वीके पांडियन के खिलाफ दायर निजी शिकायत की कार्यवाही पर औपचारिक रूप से विराम लग गया है। मामला इसलिए भी चर्चा में रहा था क्योंकि इसमें राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी को आरोपी बनाया गया था तथा सरकारी हेलीकॉप्टरों के इस्तेमाल पर करीब 500 करोड़ रुपये के खर्च का आरोप लगाया गया था।

अदालत ने अपने आदेश में मामले से जुड़े राजनीतिक विवाद या पिछली सरकार के दौरान आधिकारिक यात्राओं को लेकर उठे सवालों पर कोई टिप्पणी नहीं की। उसका निर्णय शिकायत में मौजूद कानूनी, प्रक्रियात्मक और साक्ष्य संबंधी कमियों तक ही सीमित रहा।

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