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समुद्र में समा गया सतभाया का ऐतिहासिक पंचुबराही मंदिर

  •     भारी बारिश और ऊंची समुद्री लहरों के बाद पूरी तरह डूबा प्राचीन मंदिर

  •     सतभाया की ऐतिहासिक विरासत का आखिरी प्रतीक भी मिटा

केंद्रापड़ा। ओडिशा में बढ़ते समुद्री कटाव ने एक और ऐतिहासिक धरोहर को निगल लिया है। केंद्रापड़ा जिले के सतभाया स्थित प्राचीन पंचुबराही मंदिर अब पूरी तरह समुद्र में समा गया है। कभी पुराने सतभाया बस्ती की पहचान रहे इस मंदिर के अवशेष भी अब दिखाई नहीं दे रहे हैं।

भारी बारिश और ऊंची ज्वारीय लहरों के बाद समुद्र का पानी तेजी से आगे बढ़ा और मंदिर को पूरी तरह अपने आगोश में ले लिया। सतभाया क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से लगातार समुद्री कटाव हो रहा है। समुद्र तट के लगातार पीछे खिसकने के कारण इस इलाके के अस्तित्व पर पहले से ही संकट बना हुआ था।

सुरक्षित स्थान पर बसाए गए थे ग्रामीण

समुद्री कटाव के बढ़ते खतरे को देखते हुए सतभाया के निवासियों को पहले ही बागपाटिया पुनर्वास कॉलोनी में स्थानांतरित किया जा चुका है। स्थानीय लोगों की आराध्य देवी मां पंचुबराही को भी पुनर्वास स्थल पर बनाए गए नए मंदिर में स्थापित किया गया था।

हालांकि, पुराना पंचुबराही मंदिर मूल तटरेखा के पास अपनी जगह पर बना रहा। यह मंदिर सतभाया के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की आखिरी निशानी के रूप में मौजूद था। लगातार ऊंची ज्वार और समुद्री लहरों के कारण मंदिर की संरचना वर्षों में धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होती गई। वर्ष 2025 के अंत तक मंदिर के केवल कुछ अवशेष ही दिखाई दे रहे थे। अब वे अवशेष भी समुद्र में विलीन हो गए हैं।

सात गांवों का समूह था सतभाया

सतभाया कभी सात गांवों का समूह माना जाता था। समुद्री कटाव के कारण इनमें से कई गांव पहले ही समुद्र में समा चुके हैं। इसके चलते सतभाया ओडिशा में समुद्री तट के लगातार क्षरण और उसके भयावह प्रभाव का एक प्रमुख उदाहरण बन गया है।

पंचुबराही मंदिर की धार्मिक परंपरा भी अपने आप में अनूठी थी। स्थानीय मछुआरा समुदाय की महिलाएं पारंपरिक रूप से मंदिर में पुजारिन की भूमिका निभाती थीं। ग्रामीणों के पुनर्वास के बाद देवी को नए मंदिर में स्थानांतरित किए जाने से यह धार्मिक परंपरा सुरक्षित रही और पूजा-अर्चना जारी रही।

पुराने पंचुबराही मंदिर के समुद्र में समा जाने से न केवल सतभाया की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पहचान खत्म हुई है, बल्कि इस घटना ने एक बार फिर ओडिशा के संवेदनशील समुद्र तट पर बढ़ते समुद्री कटाव के खतरे को सामने ला दिया है। समुद्र के लगातार आगे बढ़ने से राज्य की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के अस्तित्व पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है।

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