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आर्थिक सर्वे : गरीबी में आई कमी, सबसे निचले तबके की खपत में तेज वृद्धि

नई दिल्‍ली। संसद में गुरवार को पेश आर्थिक सर्वे 2025-26 में कहा गया है कि केंद्र सरकार के लक्षित कल्याणकारी उपायों से गरीबी में उल्लेखनीय कमी आई है और आय वितरण में सुधार हुआ है। इससे सबसे निचली पांच से 10 फीसदी आबादी के उपभोग व्यय में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। सर्वेक्षण में सब्सिडी, पेंशन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा पर सार्वजनिक व्यय के सकारात्मक परिणामों का जिक्र किया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में आर्थिक सर्वे 2025-26 पेश किया। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वित्‍त वर्ष 2022-23 और वित्‍त वर्ष 2023-24 के बीच प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय (एमपीसीई) में सबसे बड़ी वृद्धि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सबसे निचली पांच से 10 फीसदी आबादी के बीच देखी गई। यह सरकारी नीतियों के सकारात्मक प्रभाव को बताती है। सर्वे के अनुसार गरीबी के दुष्चक्र से कमजोर वर्ग को बाहर निकालने के लिए सरकार के उपायों का सकारात्मक परिणाम हुआ है, जो गरीबी कम करने के विभिन्न उपायों में प्रतिबिंबित होते हैं।
आर्थिक सर्वे 2025-26 में कहा गया है कि सरकारी नीतियों का आय वितरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। मुख्य रूप से सब्सिडी, पेंशन, प्रत्यक्ष अंतरण और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा सहित सामाजिक सेवाओं पर सार्वजनिक व्यय के माध्यम से आय वितरण पर सकारात्मक असर दिखा है। इस सर्वेक्षण में ग्रामीण भारत में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करते हुए स्थानीय अवसरों और नवोन्मेष के माध्यम से ग्रामीण आर्थिक गति को बढ़ाने का भी आह्वान किया गया है।
सर्वे में सबसे कमजोर वर्ग, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि आजीविका का समर्थन करने और जीवन स्तर को बिना किसी बाधा के बेहतर बनाने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार आवश्यक है। आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि ग्रामीण समुदाय नए कौशल सीख सकता है, आजीविका प्राप्त कर सकता है, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता बनाए रख सकता है, घरेलू सामंजस्य बहाल कर सकता है, आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर सकता है और साथ ही सांस्कृतिक विरासत, जुड़ाव और पर्यावरण को संरक्षित कर सकता है। इसमें सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सामाजिक विकास को बनाए रखने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही लक्षित, आंकड़ा-आधारित हस्तक्षेपों के लिए निरंतर प्रौद्योगिकी-आधारित सर्वेक्षणों की वकालत की गई है।
साभार – हिस

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