नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष 2024-25 और अगले वित्त वर्ष 2025-26 में 6.5 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है। इसकी वजह निजी उपभोग व्यय और सकल स्थिर पूंजी निर्माण में गिरावट है। चालू वित्त वर्ष 2024-25 की जुलाई-सितंबर तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर अनुमान से कहीं कम 5.4 फीसदी रही है, जो सात तिमाहियों का सबसे निचला स्तर है। इससे पिछली तिमाही अप्रैल-जून तिमाही में वृद्धि दर 6.7 फीसदी थी।
ईवाई इकोनॉमी वॉच की बुधवार को जारी नवीनतम रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2047-48 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत के राजकोषीय दायित्व ढांचे में सुधार के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट में उन प्रमुख राजकोषीय और आर्थिक उपायों पर भी प्रकाश डाला गया है, जो इस वृद्धि प्रक्षेपवक्र को बनाए रख सकते हैं और बढ़ावा दे सकते हैं। ईवाई वॉच रिपोर्ट में कहा गया है कि टिकाऊ ऋण प्रबंधन, सरकारी बचत को खत्म करने तथा निवेश आधारित वृद्धि को बढ़ावा देने से भारत के विकसित अर्थव्यवस्था में बदलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी. के. श्रीवास्तव ने राजकोषीय उत्तरदायित्व तथा बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन भारत को राजकोषीय विवेक बनाए रखते हुए सतत विकास को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाने के लिए जरूरी बताया है। अर्न्स्ट एंड यंग ग्लोबल लिमिटेड का ट्रेड नाम EY ईवाई है। ये इंग्लैंड में स्थित एक ब्रिटिशबहुराष्ट्रीय पेशेवर सेवा साझेदारी कंपनी है। ईवाई दुनिया के सबसे बड़े पेशेवर सेवा नेटवर्क में से एक है। डेलोइट, केपीएमजी और पीडब्ल्यूसी के साथ इसे बिग फोर अकाउंटिंग फर्मों में से एक माना जाता है।
हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटाकर अब 6.6 फीसदी कर दिया है।
साभार – हिस
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