नई दिल्ली। दुनिया भर में गोल्ड ईटीएफ (इक्विटी ट्रेडेड फंड) की मांग में कमी आई है, लेकिन भारत में गोल्ड ईटीएफ को लेकर निवेशकों का रुझान लगातार बना हुआ है। इस साल नवंबर महीने में लगातार आठवें महीने गोल्ड ईटीएफ में रिकॉर्ड धनराशि का निवेश हुआ है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक इस महीने गोल्ड ईटीएफ में कुल 17.5 करोड़ डॉलर का निवेश किया गया है।
जानकारों का कहना है कि सोने की तरह ही गोल्ड ईटीएफ को भी निवेश के लिए सेफ इंस्ट्रूमेंट माना जाता है। ऐसे में घरेलू शेयर बाजार में अक्टूबर से ही जारी उथल-पुथल के कारण निवेशकों का रुझान गोल्ड ईटीएफ की ओर बढ़ा है। अक्टूबर के बाद नवंबर में भी निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ को हाथों-हाथ लिया है। मार्केट एक्सपर्ट मयंक मोहन का कहना है कि शेयर बाजार में जारी उथल-पुथल के साथ ही गोल्ड ईटीएफ को लेकर केंद्र सरकार द्वारा नियमों में बदलाव करने के कारण भी निवेशकों के लिए अब गोल्ड ईटीएफ पहले से ज्यादा आकर्षक हो गया है।
इस साल केंद्र सरकार ने यूनियन बजट में गोल्ड ईटीएफ से जुड़े टैक्स के नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक गोल्ड ईटीएफ को एक साल की अवधि पूरा होने के बाद बेचने पर 12.5 प्रतिशत की दर से कैपिटल गैन टैक्स लगेगा। पहले कैपिटल गैन टैक्स निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से लगता था। नियमों में किए गए इस बदलाव के कारण निवेशकों के लिए अब गोल्ड ईटीएफ पहले की तुलना में ज्यादा आकर्षक हो गया है।
इसी तरह बुलियन मार्केट एक्सपर्ट संतोष तनेजा का कहना है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड बंद होने के कारण भी देश में गोल्ड ईटीएफ के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। फिजिकल गोल्ड की जगह गोल्ड ईटीएफ पर निवेश करने से निवेशकों को जीएसटी बेनिफिट भी मिलता है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये निवेश पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित होता है। इसलिए भारतीय निवेशकों में गोल्ड ईटीएफ को लेकर रुझान लगातार बना हुआ है।
साभार -हिस
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