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देश में अविश्वास का माहौल बनाने का प्रयास : अनिल बिस्वाल

  •     कहा-देश में अराजकता फैलाने और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश रच रही कांग्रेस

  •  सत्ता के लिए बेचैन, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर विश्वसनीयता को कमजोर करने की कोशिश

भुवनेश्वर। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन पर देश में अराजकता फैलाने तथा संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस और विपक्षी दलों के हालिया प्रदर्शन से उनकी मंशा स्पष्ट हो गई है। लोकतंत्र में आंदोलन का अधिकार है, लेकिन आंदोलन के नाम पर हिंसा और अशांति फैलाने का प्रयास स्वीकार्य नहीं है।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बिस्वाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पेरिस, नेपाल और बांग्लादेश जैसी घटनाओं के माध्यम से भारत में भी अस्थिरता पैदा करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी के विदेश दौरों और वामपंथी संगठन ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ के साथ कांग्रेस नेतृत्व के संपर्कों को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए बेचैन है और राजनीतिक पराजय को स्वीकार करने के बजाय देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठा रही है।

बिस्वाल ने कहा कि कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और भारतीय सेना की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के तीनों आयुक्तों ने संयुक्त हलफनामे में स्पष्ट किया है कि निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। इसके बावजूद न्यायालय में जवाब देने के लिए मांगी गई समय-सीमा पूरी होने से पहले सड़कों पर प्रदर्शन करना कांग्रेस की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर और सीमा सुरक्षा के मामलों में भारतीय सेना तथा वायुसेना की कार्रवाई पर सवाल उठाकर देश की सुरक्षा व्यवस्था के प्रति अविश्वास जताया है।

ईवीएम और बैलेट पेपर को लेकर कांग्रेस के रुख को दोहरा चरित्र बताते हुए बिस्वाल ने कहा कि 1989 में राजीव गांधी की हार के बाद कांग्रेस ने बैलेट पेपर के स्थान पर ईवीएम की मांग की थी, जबकि आज वही पार्टी ईवीएम पर सवाल उठा रही है। उन्होंने दावा किया कि चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। उन्होंने कांग्रेस को चुनावी परिणामों की समीक्षा करने की सलाह दी।

बिस्वाल ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 में तत्कालीन यूपीए सरकार के कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा था कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है और प्रदर्शन का स्थान सरकार तय करेगी। अब कांग्रेस स्वयं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सवाल उठा रही है।

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि केरल और कर्नाटक के कांग्रेस नेताओं ने भी स्वीकार किया है कि इस प्रक्रिया से फर्जी और मृत मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी मतदाताओं और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाए जाने से कांग्रेस परेशान है। ईवीएम में गड़बड़ी के आरोपों पर उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है तो उसे कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड में मिली अपनी चुनावी जीत पर भी सवाल उठाना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव हारने पर अंपायर को दोष देने की नीति अपना रही है। बिस्वाल ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी और जागरूक नागरिक कांग्रेस के कथित दोहरे चरित्र और भ्रामक राजनीतिक विमर्श को समझ चुके हैं। भारत की जनता लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देगी।

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