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चक्रवात अर्णव से प्रभावित लोगों के लिए पैकेज की घोषणा

  •     मुख्यमंत्री मोहन माझी ने किया ऐलान

  •     किसानों को 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक मदद

  •     प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 किलोग्राम चावल भी मिलेगा

भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चक्रवात ‘अर्णव’ से प्रभावित लोगों के लिए व्यापक राहत एवं पुनर्वास पैकेज की घोषणा की है। इस पैकेज के तहत किसानों, मकान क्षति झेलने वाले परिवारों, पशुपालकों, मछुआरों, महिला स्वयं सहायता समूहों, बुनकरों, हस्तशिल्पियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 किलोग्राम चावल के साथ 2,500 रुपये की अनुग्रह सहायता भी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने शनिवार देर शाम विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) के कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में चक्रवात अर्णव के प्रभाव, राहत एवं बचाव कार्यों, पुनर्निर्माण तथा नुकसान के आकलन की समीक्षा करने के बाद यह घोषणा की।

बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी, मुख्य सचिव अनु गर्ग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ अरविंद पाढ़ी तथा विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चक्रवात से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी स्थिति पर चर्चा की गई है।

उन्होंने जानकारी दी कि 2 नवंबर को केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी समिति ओडिशा का दौरा करेगी। समिति विशेष रूप से चक्रवात से सर्वाधिक प्रभावित गंजाम, गजपति और कंधमाल जिलों में हुए नुकसान का आकलन करेगी।

चक्रवात ‘मुरासु’ की आशंका, राहत टीमें तैनात रहेंगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि चक्रवात अर्णव का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और एक अन्य संभावित चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ को लेकर भी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

उन्होंने निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में सरकारी राहत एवं निगरानी टीमें पहले से तैनात हैं, वे वहीं बनी रहेंगी और परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कदम उठाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संभावित नए मौसम संबंधी खतरे को देखते हुए राहत एवं निगरानी व्यवस्था में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

किसानों को प्रति हेक्टेयर 22,500 रुपये तक सहायता

कृषि क्षेत्र में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने विशेष सहायता की घोषणा की है। 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर तक इनपुट सब्सिडी दी जाएगी।

सहायता की दरें इस प्रकार निर्धारित की गई हैं:

  • असिंचित भूमि के लिए8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर।
  • सिंचित भूमि के लिए17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर।
  • बारहमासी फसलों के लिए22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर।

इसके अलावा न्यूनतम इनपुट सहायता के तहत बारहमासी फसलों के लिए 2,500 रुपये, सिंचित भूमि के लिए 2,000 रुपये तथा असिंचित भूमि के लिए 1,000 रुपये दिए जाएंगे।

जिन खेतों में बालू या गाद जमा हो गई है, वहां से उसे हटाने के लिए 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता दी जाएगी। प्रत्येक प्रभावित किसान को न्यूनतम 2,200 रुपये मिलेंगे।

किसानों को आगामी फसल के लिए 1.20 लाख दलहन मिनीकिट, 5,000 तिलहन किट और 50,000 सब्जी बीज किट उपलब्ध कराए जाएंगे। इस प्रकार कुल 1.75 लाख विशेष मिनीकिट वितरित किए जाएंगे।

गन्ने की खेती वाले प्रभावित 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष सहायता दी जाएगी। स्पेस ट्रांसप्लांटिंग पद्धति के प्रदर्शन के लिए 27,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा रैटून फसल प्रबंधन के लिए 12,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता का प्रावधान किया गया है।

वर्ष 2026-27 के रबी मौसम में कीटनाशकों और जैविक कीटनाशकों की खरीद पर 75 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जाएगी।

कृषि ऋण के पुनर्गठन की व्यवस्था

33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल नुकसान वाले क्षेत्रों में इच्छुक किसानों के अल्पकालीन खरीफ कृषि ऋण को मध्यम अवधि के ऋण में परिवर्तित किया जाएगा।

इसके अलावा भूमिहीन किसानों, बटाईदारों और मौखिक समझौतों के आधार पर खेती करने वाले किसानों को रबी मौसम में ऋण उपलब्ध कराने के लिए संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) गठित किए जाएंगे।

मकान क्षति पर 1.30 लाख रुपये तक सहायता

चक्रवात में पूरी तरह या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण के लिए समतल क्षेत्रों में 1.20 लाख रुपये और पहाड़ी क्षेत्रों में 1.30 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।

आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पक्के मकानों के लिए 6,500 रुपये और कच्चे मकानों के लिए 4,000 रुपये दिए जाएंगे। क्षतिग्रस्त झोपड़ियों के लिए 8,000 रुपये तथा पशुशालाओं के लिए 3,000 रुपये की सहायता निर्धारित की गई है।

जिन परिवारों के मकान पूरी तरह बह गए हैं, नष्ट हो गए हैं अथवा दो दिनों से अधिक समय तक जलमग्न रहे हैं, उन्हें कपड़ों के नुकसान के लिए 2,500 रुपये और घरेलू बर्तनों के नुकसान के लिए 2,500 रुपये दिए जाएंगे।

पशुधन के नुकसान पर मुआवजा

पशुपालकों को भी विशेष राहत प्रदान की जाएगी। दुधारू गाय और भैंस की मृत्यु पर 37,500 रुपये, भेड़, बकरी और सूअर की मृत्यु पर 4,000 रुपये का मुआवजा मिलेगा।

ऊंट, घोड़े और बैल जैसे बड़े भारवाही पशुओं के लिए 32,000 रुपये तथा बछड़े, गधे, टट्टू और खच्चर जैसे छोटे भारवाही पशुओं के लिए 20,000 रुपये दिए जाएंगे। मुर्गियों की मृत्यु पर प्रति पक्षी 100 रुपये की सहायता मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 10,000 रुपये होगी।

इसके अतिरिक्त 1,000 किसानों को बकरी या बैल जैसे पशु खरीदने के लिए सब्सिडी दी जाएगी। प्रभावित क्षेत्रों के 5,000 दुग्ध उत्पादक किसानों को प्रति पशु 100 किलोग्राम के हिसाब से अधिकतम 500 किलोग्राम पशु आहार उपलब्ध कराया जाएगा।

70 प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त हुए 200 पोल्ट्री फार्मों को मुख्यमंत्री कृषि उद्योग योजना के तहत पुनर्वास सहायता दी जाएगी।

मछुआरों और मत्स्य पालकों के लिए विशेष पैकेज

प्रभावित मत्स्य पालकों को प्रति हेक्टेयर 1,12,500 रुपये की दर से अधिकतम 75 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जाएगी।

क्षतिग्रस्त नौकाओं के लिए 22,500 रुपये और मछली पकड़ने के जाल के लिए 15,000 रुपये दिए जाएंगे। समुद्री तथा चिलिका झील के मछुआरों को पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त नौकाओं के लिए 60,000 रुपये और जाल के नुकसान पर 15,000 रुपये की सहायता मिलेगी।

तालाबों के बांध टूटने या मिट्टी के कटाव से प्रभावित मत्स्य पालकों को भी राहत दी जाएगी। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लीज पर लिए गए सामुदायिक तालाबों को भी इस पैकेज में शामिल किया गया है। इसके लिए प्रति हेक्टेयर अधिकतम 1.75 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है।

एमएसएमई , दुकानदारों और महिला समूहों को राहत

चक्रवात से प्रभावित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, दुकानदारों, व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी संचालकों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी सहायता मिलेगी।

क्षतिग्रस्त एमएसएमई  इकाइयों, व्यापारियों और दुकानदारों को अधिकतम 12 लाख रुपये तक ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस ऋण पर अधिकतम 3 लाख रुपये तक 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। राज्य सरकार सब्सिडी की राशि सीधे संबंधित बैंकों को उपलब्ध कराएगी।

रेहड़ी-पटरी वालों, अस्थायी स्टॉल और कियोस्क संचालकों को 10,000 रुपये तथा दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 25,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। सहायता निर्धारित करने के लिए दुकानों, मशीनों, उपकरणों, भंडारित सामान और अन्य व्यावसायिक संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा।

चक्रवात से प्रभावित पात्र महिला स्वयं सहायता समूहों को अतिरिक्त 5,000 रुपये की सीड मनी प्रदान की जाएगी।

बुनकरों, हस्तशिल्पियों और रेशम उत्पादकों को सहायता

हस्तशिल्प एवं हथकरघा क्षेत्र से जुड़े बुनकरों और कारीगरों को उपकरणों के प्रतिस्थापन के लिए प्रति व्यक्ति 5,000 रुपये तथा नष्ट हुई सामग्री के नुकसान की भरपाई के लिए अतिरिक्त 5,000 रुपये दिए जाएंगे।

प्रभावित रेशम उत्पादकों को एरी, शहतूत और टसर की खेती के लिए 6,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा मूगा रेशम की खेती के लिए 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर इनपुट सहायता मिलेगी। पूरी तरह क्षतिग्रस्त रेशम पालन गृहों के पुनर्निर्माण के लिए प्रत्येक प्रभावित किसान को 1.75 लाख रुपये दिए जाएंगे।

रबी मौसम से पहले सिंचाई व्यवस्था बहाल करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने ओडिशा लिफ्ट इरिगेशन कॉरपोरेशन को सभी प्रभावित गांवों में प्राथमिकता के आधार पर लिफ्ट सिंचाई केंद्रों की मरम्मत करने का निर्देश दिया है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आगामी रबी मौसम शुरू होने से पहले सभी लिफ्ट सिंचाई केंद्रों को पूरी तरह चालू किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को अगली फसल की खेती में परेशानी न हो।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित प्रत्येक वर्ग को राहत और पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबंधित विभागों को नुकसान का आकलन कर पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया।

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