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निमापड़ा में छात्र संघ चुनाव बाद बढ़ी सियासी हलचल

  •     बीजद के समर्थन से भाजपा नेता समीर दाश के करीबी उम्मीदवार की हुई जीत

  •     छात्रसंघ चुनाव में सौमेंद्र भोला ने एबीवीपी समर्थित प्रत्याशी को 291 मतों से हराया

  •    उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा के साथ बढ़ती दूरी के बीच बीजद में वापसी की अटकलें तेज

भुवनेश्वर। ओडिशा की निमापड़ा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में एक बार फिर नए समीकरण बनने के संकेत मिलने लगे हैं। निमापड़ा स्वायत्त महाविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में पूर्व बीजद नेता तथा अब भाजपा नेता समीर रंजन दाश के समर्थन से उम्मीदवार सौमेंद्र भोला की जीत ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। खास बात यह है कि भोला को बीजू जनता दल (बीजद) का भी समर्थन मिला था। इस घटनाक्रम के बाद अब सवाल उठने लगा है कि क्या समीर दाश एक बार फिर भाजपा का साथ छोड़कर अपने पुराने राजनीतिक दल बीजद में लौट सकते हैं?

बीजद के समर्थन के प्रति सार्वजनिक सराहना की

हालांकि, समीर दाश की ओर से बीजद में वापसी को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है, लेकिन चुनाव में बीजद के समर्थन के प्रति उनकी सार्वजनिक सराहना ने इन अटकलों को हवा दे दी है। आगामी पंचायत चुनावों से पहले निमापड़ा की राजनीति में इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बीजद प्रत्याशी का नामांकन रद्द

निमापड़ा स्वायत्त महाविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में उस समय नया मोड़ आ गया, जब बीजू छात्र जनता दल (बीसीजेडी) के उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया। इसके बाद बीजद ने समीर रंजन दाश समर्थित उम्मीदवार सौमेंद्र भोला को समर्थन दिया।

इस समर्थन का चुनावी परिणाम पर असर दिखाई दिया। सौमेंद्र भोला ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) समर्थित उम्मीदवार को 291 मतों के अंतर से पराजित कर छात्रसंघ अध्यक्ष का पद जीत लिया। एबीवीपी समर्थित उम्मीदवार को निमापड़ा की विधायक और ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा का समर्थन प्राप्त था।

इस जीत ने केवल महाविद्यालय की छात्र राजनीति में ही नहीं, बल्कि निमापड़ा के व्यापक राजनीतिक समीकरणों में भी नई चर्चा छेड़ दी है। बीजद और समीर दाश के समर्थित उम्मीदवार के बीच बने इस चुनावी तालमेल को आने वाले दिनों की राजनीति के लिहाज से भी देखा जा रहा है।

प्रभाती परिडा से बढ़ती दूरी ने अटकलों को दिया बल

समीर दाश और प्रभाती परिडा के बीच राजनीतिक दूरी भी इन चर्चाओं का एक प्रमुख कारण बन गई है। दोनों नेता कभी बीजद से जुड़े हुए थे, लेकिन वर्ष 2024 के आम चुनाव से पहले समीर दाश भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद से दोनों अलग-अलग राजनीतिक खेमों में हैं।

पिछले कुछ समय से समीर दाश द्वारा प्रभाती परिडा पर निशाना साधे जाने और उनके खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से आलोचनात्मक टिप्पणियां किए जाने की चर्चा रही है। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव के दौरान बीजद का समर्थन मिलना और समीर दाश की ओर से उसकी सराहना किया जाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पंचायत चुनाव में दिख सकता है नया राजनीतिक समीकरण

निमापड़ा में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर अभी से राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। समीर दाश ने मीडिया से बातचीत में कहा कि निमापड़ा और गोप क्षेत्र की वास्तविक राजनीतिक स्थिति तथा यहां के लोगों की सोच आगामी पंचायत चुनावों में भी दिखाई देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि उस समय भी इसी तरह के चुनाव परिणाम देखने को मिलेंगे।

दाश के इस बयान को क्षेत्र में अपने राजनीतिक प्रभाव को लेकर उनके आत्मविश्वास के रूप में देखा जा रहा है। छात्रसंघ चुनाव में मिली जीत के बाद उनके समर्थक भी इसे अपने पक्ष में बदलते राजनीतिक माहौल के संकेत के तौर पर पेश कर सकते हैं।

बीजद में वापसी की राह इतनी आसान नहीं

समीर दाश की संभावित वापसी को लेकर चर्चा के बीच निमापड़ा में बीजद के अन्य प्रमुख नेताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में बीजद के उम्मीदवार रहे दिलीप नायक और सुब्रत छाटोई जैसे नेताओं की क्षेत्र में अपनी राजनीतिक मौजूदगी है।

ऐसे में यदि भविष्य में समीर दाश बीजद में वापसी की दिशा में कोई कदम उठाते हैं, तो पार्टी के भीतर राजनीतिक समीकरण और स्थानीय नेतृत्व के साथ तालमेल अहम हो सकता है। फिलहाल इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

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