-
सीमा विवाद फिर भड़का
-
3 नवंबर को जिला एवं मंडल पंचायत निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की तैयारी
-
दिसंबर तक सरपंच और वार्ड सदस्य के चुनाव प्रस्तावित
-
कोरापुट जिले के सीमावर्ती गांवों पर प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर बढ़ सकती है दोनों राज्यों में तनातनी
भुवनेश्वर। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे कोटिया सीमा विवाद के एक बार फिर गहराने के आसार हैं। विवादित कोटिया क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराने की आंध्र प्रदेश की कथित तैयारी ने ओडिशा सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश में जिला पंचायत निर्वाचन क्षेत्र (जेडपीटीसी) और मंडल पंचायत निर्वाचन क्षेत्र (एमपीटीसी) के सदस्यों के चुनाव के लिए 3 नवंबर 2026 को मतदान तथा 5 नवंबर को मतगणना प्रस्तावित है। इसके अलावा सरपंच और वार्ड सदस्यों के चुनाव 26 नवंबर, 29 नवंबर और 2 दिसंबर को तीन चरणों में कराने की योजना बताई गई है। हालांकि, चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक आधिकारिक अधिसूचना की पुष्टि होना अभी बाकी है।
कोरापुट जिले के कोटिया क्षेत्र को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से प्रशासनिक अधिकारों और क्षेत्रीय दावों का विवाद चला आ रहा है। ऐसे में आंध्र प्रदेश की चुनावी तैयारियों को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि इससे दोनों राज्यों के बीच तनाव फिर बढ़ सकता है।
तीन पंचायतों में बांटा गया कोटिया क्षेत्र
विवाद की ताजा वजह आंध्र प्रदेश की ओर से कोटिया क्षेत्र को तीन पंचायतों, गंजेवाड़ारा, पाटुसिनारी और धुलिभद्रा, में विभाजित कर प्रशासनिक गतिविधियां संचालित करना है। ये नाम ओडिशा द्वारा मान्यता प्राप्त गांवों गंजेईपदर, फातुसिनेरी और धुलिपदर से संबंधित बताए जाते हैं।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश दोनों इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर अपना प्रशासनिक अधिकार जताते रहे हैं। इस कारण यहां पंचायत व्यवस्था, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और चुनावों को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आता रहा है।
कोटिया क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों और भौगोलिक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसलिए यहां प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करने की कोशिशों को दोनों राज्यों के बीच व्यापक क्षेत्रीय विवाद के संदर्भ में देखा जाता है।
2021 में भी हुए चुनाव, 2024 में उठा था विवाद
कोटिया में चुनाव कराने की आंध्र प्रदेश की कोशिश कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2021 में भी आंध्र प्रदेश ने इस विवादित क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराए थे। उस समय ओडिशा सरकार ने इसका विरोध किया था और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर कानूनी स्तर पर भी आपत्ति उठाई गई थी।
वर्ष 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान भी इस क्षेत्र में चुनावी गतिविधियों को लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद चर्चा में रहा था।
अब नवंबर और दिसंबर 2026 में प्रस्तावित पंचायत चुनावों की तैयारी से यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। स्थानीय स्तर पर चुनाव कराने की प्रक्रिया को आंध्र प्रदेश के प्रशासनिक दावे से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि ओडिशा इस क्षेत्र पर अपने अधिकार को लेकर पहले भी आपत्ति दर्ज कराता रहा है।
ओडिशा सरकार के सामने प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती
कोटिया क्षेत्र में आंध्र प्रदेश की चुनावी गतिविधियां ओडिशा सरकार के लिए प्रशासनिक चुनौती बन सकती हैं। यदि आंध्र प्रदेश निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चुनाव आगे बढ़ाता है, तो ओडिशा की ओर से विरोध, कानूनी कार्रवाई या प्रशासनिक स्तर पर जवाब दिए जाने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।
राजनीतिक और स्थानीय पर्यवेक्षकों की चिंता यह भी है कि चुनावी गतिविधियां दोनों राज्यों के बीच पहले से मौजूद विवाद को और जटिल बना सकती हैं। हालांकि, प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर आंध्र प्रदेश की औपचारिक अधिसूचना और ओडिशा सरकार की ताजा प्रतिक्रिया की पुष्टि आवश्यक है।
कोटिया विवाद पर फिर टिकी दोनों राज्यों की निगाहें
कोटिया सीमा विवाद केवल पंचायत चुनावों तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में क्षेत्रीय अधिकार, स्थानीय प्रशासन और सीमावर्ती गांवों में सरकारी व्यवस्था का संचालन जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न हैं। ऐसे में चुनाव कराने का कोई भी कदम दोनों राज्यों के बीच संवेदनशील मुद्दा बन जाता है।
नवंबर में प्रस्तावित मतदान और दिसंबर तक सरपंच एवं वार्ड सदस्य चुनावों की तैयारी से विवाद के फिर तेज होने की आशंका है। अब निगाहें आंध्र प्रदेश की आधिकारिक चुनाव अधिसूचना, ओडिशा सरकार के रुख और दोनों राज्यों के प्रशासनिक कदमों पर टिकी हैं।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
