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‘डबल इंजन’ सरकार के वादे पर उठाए सवाल
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‘आंध्र गो बैक’ का नारा क्या केवल चुनावी हथकंडा था – नवीन
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पटनायक ने भाजपा सरकार को घेरा
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पूछा—केंद्र और ओडिशा में सत्ता होने के बावजूद कोटिया पर आंध्र प्रदेश के चुनावी कदमों को क्यों नहीं रोका गया?
भुवनेश्वर। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से विवादित कोटिया क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराने की आंध्र प्रदेश की तैयारी ने राज्य की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को कड़ा पत्र लिखकर कोटिया पर राज्य सरकार की नीति और उसकी राजनीतिक इच्छाशक्ति पर सवाल उठाए हैं।
नवीन ने भाजपा के उस चुनावी वादे को भी कठघरे में खड़ा किया है, जिसमें ‘डबल इंजन’ सरकार बनने पर कोटिया विवाद का स्थायी समाधान करने, ओडिशा की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने और ‘ओड़िया स्वाभिमान’ को मजबूत करने का संकल्प लिया गया था।
नवीन ने सवाल किया कि जब केंद्र और ओडिशा, दोनों जगह भाजपा की सरकार है, तब भी आंध्र प्रदेश विवादित गांवों में पंचायत चुनाव कराने की दिशा में आगे कैसे बढ़ रहा है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार के लिए तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के समर्थन की राजनीतिक मजबूरी के कारण ओडिशा सरकार इस मुद्दे पर नरम रुख अपना रही है? उनके पत्र ने कोटिया विवाद को एक बार फिर भाजपा सरकार की चुनावी प्रतिबद्धताओं और प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़ दिया है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को लिखे पत्र में नवीन पटनायक ने कोटिया क्षेत्र के गांवों में पंचायत चुनावों को लेकर आंध्र प्रदेश की अधिसूचना पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने फागुनासिनेरी, गंजेईपादर और फातुसिनेरी सहित विवादित गांवों का उल्लेख करते हुए कहा कि ओडिशा की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि उनके कार्यकाल में ओडिशा सरकार ने कोटिया पर राज्य के दावे की रक्षा के लिए सक्रिय कदम उठाए थे। उन्होंने भाजपा नेताओं के पूर्ववर्ती रुख का भी उल्लेख किया, जब कोटिया को ओडिशा का हिस्सा बताते हुए ‘आंध्र गो बैक’ का नारा दिया गया था।
नवीन ने भाजपा के 2024 के विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादे का हवाला देते हुए पूछा कि कोटिया विवाद को हमेशा के लिए समाप्त करने और ओड़िया स्वाभिमान की रक्षा करने का संकल्प आखिर कहां गया? उनके अनुसार, ओडिशा और केंद्र में भाजपा की सरकार होने के बावजूद विवाद का फिर उभरना सरकार की प्रतिबद्धताओं पर सवाल खड़े करता है।
16 सदस्यीय कोटिया समिति की सिफारिशें सार्वजनिक करने की मांग
नवीन पटनायक ने वर्ष 2025 में गठित उच्चस्तरीय 16 सदस्यीय कोटिया समिति की सिफारिशों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने जानना चाहा कि समिति ने क्या सुझाव दिए थे और उनकी सिफारिशों को लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
कोटिया विवाद दशकों पुराना है। ऐसे में समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकार की कार्रवाई को लेकर नवीन का सवाल महत्वपूर्ण राजनीतिक विषय बन गया है। विपक्ष यह जानना चाहता है कि राज्य सरकार ने विवाद के स्थायी समाधान के लिए कौन-सी ठोस प्रशासनिक, कानूनी और कूटनीतिक पहल की है।
नवीन ने अपने पत्र में कहा कि ओडिशा की जनता को इस मामले में स्पष्ट जवाब और जवाबदेही मिलनी चाहिए। उन्होंने सरकार से कोटिया पर ओडिशा के क्षेत्रीय अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने का आग्रह किया।
28 गांवों पर विवाद, दशकों से जारी है कानूनी लड़ाई
कोटिया विवाद कोरापुट जिले के पोट्टांगी प्रखंड की कोटिया ग्राम पंचायत के 28 गांवों से जुड़ा है। ओडिशा इन सभी गांवों पर अपना दावा करता है, जबकि आंध्र प्रदेश इनमें से 21 गांवों पर दावा जताता रहा है और वहां प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध कराने की गतिविधियां भी संचालित करता रहा है।
इस विवाद को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से कानूनी और प्रशासनिक टकराव जारी है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, मामला 1968 से उच्चतम न्यायालय के समक्ष है और दोनों राज्यों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया था।
आंध्र प्रदेश के कदमों का मुकाबला करने को तैयार सरकार – मंत्री सुरेश पुजारी
इससे पहले ओडिशा के राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा था कि कोटिया क्षेत्र में आंध्र प्रदेश की ओर से किसी भी तरह की कोशिश का मुकाबला करने के लिए सरकार तैयार है। ऐसे में नवीन पटनायक के ताजा पत्र ने सरकार के इस दावे और उसके वास्तविक कदमों को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
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