-
वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन 181 होगा मजबूत
-
महिलाओं और बच्चों के विकास के लिए बनी समयबद्ध कार्ययोजना
-
उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा ने की समीक्षा
-
चार प्रमुख क्षेत्रों पर जल्द होगा राज्यस्तरीय शिखर सम्मेलन
भुवनेश्वर। ओडिशा में महिलाओं की सुरक्षा के लिए वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन 181 को मजबूत किया जाएगा। पुलिस, स्वास्थ्य सेवाओं, कानूनी सहायता और पुनर्वास से जुड़ी संस्थाओं के बीच समन्वय बेहतर बनाने पर जोर रहेगा, ताकि संकट में फंसी महिलाओं को समय पर आवश्यक सहायता मिल सके।
बाल विवाह की रोकथाम के लिए सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने, गांव स्तर पर संवेदनशील परिवारों और क्षेत्रों की पहचान करने तथा अधिक प्रचलन वाले 12 जिलों में लक्षित जागरूकता अभियान चलाने की योजना है। कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यौन उत्पीड़न रोकथाम संबंधी पीओएसएच व्यवस्था और एस-ही-बॉक्स तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा।
सभी 30 जिलों में महिला आर्थिक सशक्तीकरण की रूपरेखा
महिला सशक्तीकरण के तहत कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास और शिशु देखभाल केंद्रों जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को मजबूत करने के साथ प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और ओडिशा की ममता योजना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
राज्य के सभी 30 जिलों में महिला आर्थिक सशक्तीकरण रूपरेखा लागू करने की योजना है। इसके माध्यम से महिलाओं की रोजगार में भागीदारी, आय, उद्यमिता और आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता से जुड़े आंकड़ों के आधार पर जिलावार लक्ष्य तय किए जाएंगे। नियमित निगरानी के जरिए इन लक्ष्यों की प्रगति का आकलन भी किया जाएगा।
समयबद्ध कार्ययोजना हो रही तैयार
ओडिशा में महिलाओं और बच्चों के विकास, पोषण, सुरक्षा तथा आर्थिक सशक्तीकरण को गति देने के लिए राज्य सरकार समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर रही है। उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा ने शुक्रवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। इन प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने के लिए जल्द ही राज्यस्तरीय शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
यह कार्ययोजना नई दिल्ली में 8 और 9 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन के बाद तैयार की गई है। उस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित थे। राज्य सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए प्रमुख कार्यबिंदुओं को ठोस परिणामों में बदलना और योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना है।
चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा सरकार का विशेष ध्यान
राज्य सरकार ने केंद्र के अनुरूप चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है। इनमें पोषण एवं प्रारंभिक बाल विकास, मिशन वात्सल्य के तहत बाल संरक्षण, महिलाओं की सुरक्षा और महिला सशक्तीकरण शामिल हैं। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए विभागों के बीच बेहतर तालमेल और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्थाओं को मजबूत करने, योजनाओं के क्रियान्वयन में मौजूद कमियों को दूर करने और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता तथा पहुंच में सुधार लाने की आवश्यकता है, ताकि महिलाओं और बच्चों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
पोषण और आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने की तैयारी
पोषण एवं प्रारंभिक बाल विकास के तहत घर ले जाने के लिए दिए जाने वाले राशन और आंगनबाड़ी केंद्रों में उपलब्ध गर्म पके भोजन की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया जाएगा। पोषण ट्रैकर के माध्यम से बच्चों की पोषण स्थिति की निगरानी मजबूत करने तथा गंभीर तीव्र कुपोषण से प्रभावित बच्चों की समय पर पहचान और उचित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की योजना है।
इसके साथ ही प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा सेवाओं को बेहतर बनाया जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों को पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के अनुकूल बनाने, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने और बच्चों की शिक्षा में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। बच्चों को औपचारिक विद्यालयी शिक्षा में सहज रूप से प्रवेश दिलाना भी कार्ययोजना का हिस्सा है।
मिशन वात्सल्य के तहत बाल संरक्षण और पुनर्वास पर जोर
बाल संरक्षण के क्षेत्र में सरकार परिवार-केंद्रित व्यवस्था और रोकथाम आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देगी। इसके तहत संकटग्रस्त एवं संवेदनशील परिवारों की पहचान, बच्चों को संस्थागत देखभाल के बजाय सुरक्षित पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने और संस्थानों से बाहर आने वाले बच्चों के पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा, नियमित समीक्षा और बाल संरक्षण से संबंधित आंकड़ों के बेहतर समन्वय के माध्यम से योजनाओं की जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी है, ताकि जरूरतमंद बच्चों को समय पर सहायता मिल सके।
समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त-सह-सचिव डॉ मृणालिनी दर्सवाल, निदेशक मोनिशा बनर्जी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
