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ओडिशा के नए राज्यपाल के विवादित बयान पर विपक्ष का हमला

  •     ब्रज मोहन राम की निष्पक्षता पर नवीन पटनायक ने उठाए सवाल

  •     भाजपा संगठन को मजबूत करने संबंधी कथित बयान पर शुरू विवाद

  •     कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने भी उठाए सवाल

  •     राज्यपाल ने दी सफाई

भुवनेश्वर। ओडिशा के नए राज्यपाल के रूप में ब्रज मोहन राम की नियुक्ति के बाद उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और संवैधानिक निष्पक्षता को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने राज्यपाल के भाजपा संगठन को मजबूत करने संबंधी कथित बयान पर सवाल उठाए हैं। विवाद बढ़ने के बाद राज्यपाल-नामित ब्रज मोहन राम ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर रहते हुए वह किसी विशेष राजनीतिक दल के लिए काम नहीं करेंगे, बल्कि सभी के साथ समन्वय बनाकर काम करेंगे।

नवीन ने संवैधानिक मर्यादा का दिलाया ध्यान

नवीन पटनायक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर ब्रज मोहन राम का ओडिशा में स्वागत करते हुए उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि राज्य की जनता नए राज्यपाल के पार्टी संबंधी कार्यों के प्रति उत्साह पर नजर रख रही है। पटनायक ने भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की कि वह राज्यपाल को निष्पक्षता के साथ संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने और पद की गरिमा बनाए रखने की शक्ति प्रदान करें।

इससे पहले बीजद ने राज्यपाल के उस कथित बयान पर नाराजगी जताई थी, जिसमें उनके ओडिशा पहुंचने के बाद भाजपा संगठन को मजबूत करने के लिए काम करने की बात कही गई थी। बीजद के मीडिया समन्वयक लेनिन मोहंती ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के अनुरूप नहीं है।

अब मैं दलगत राजनीति से ऊपर हूं – ब्रज मोहन

विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रज मोहन राम ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने किसी विशेष राजनीतिक दल के लिए काम करने की बात नहीं कही है। उनके अनुसार, उन्होंने सभी के साथ समन्वय बनाकर काम करने की बात कही थी।

राम ने कहा कि नहीं, मैंने ऐसा नहीं कहा। मैंने कहा था कि मैं सभी के साथ समन्वय बनाकर काम करूंगा। अब मैं दलगत राजनीति से ऊपर हूं, लेकिन जिस पार्टी से मैं जुड़ा रहा हूं, वह मेरी पूंजी है। उस पार्टी के प्रति मेरा लगाव और प्रेम हमेशा रहेगा। लेकिन मैं किसी विशेष पार्टी के लिए काम नहीं करूंगा। हम सबके हैं और सब हमारे हैं।

ब्रज मोहन राम ओडिशा के 44वें राज्यपाल के रूप में डॉ हरि बाबू कंभमपाटी का स्थान लेंगे। उनकी नियुक्ति के बाद राजनीतिक दलों के बीच राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका और निष्पक्षता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

राज्यपाल का दायित्व संविधान की रक्षा करना – कांग्रेस

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर कहा कि राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी निष्पक्ष रूप से संविधान की रक्षा करना है, न कि किसी राजनीतिक दल के चुनावी हितों को आगे बढ़ाना। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों को दलगत राजनीति से ऊपर रहना चाहिए।

भक्त चरण दास ने आरोप लगाया कि ब्रज मोहन राम ने पहले झारखंड में जिस तरह भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के लिए काम किया था, उसी तरह ओडिशा में भी भाजपा के एससी मोर्चा के लिए काम करने की बात कही है। यह आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाया गया है, जबकि राज्यपाल ने किसी विशेष दल के लिए काम करने की बात से इनकार किया है।

महुआ मोइत्रा ने भी कसा तंज

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के माध्यम से कटाक्ष किया। उन्होंने ओडिशा के लोगों को संबोधित करते हुए राज्य के नए राज्यपाल की नियुक्ति और भाजपा संगठन को मजबूत करने संबंधी कथित बयान पर टिप्पणी की। उनकी पोस्ट में राज्यपाल की भूमिका को लेकर व्यंग्यात्मक लहजा था।

इस विवाद के केंद्र में राज्यपाल के संवैधानिक दायित्वों और उनकी पूर्व राजनीतिक संबद्धता के बीच संतुलन का सवाल है। विपक्षी दलों ने निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा पर जोर दिया है, जबकि ब्रज मोहन राम ने स्पष्ट किया है कि राज्यपाल के रूप में वह सभी के साथ मिलकर काम करेंगे और किसी एक राजनीतिक दल के लिए काम नहीं करेंगे।

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