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स्तन कैंसर की समय पर पहचान के लिए शुरू हुई नई पहल
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हर महीने करीब 100 मरीज पहुंच रहे मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग
भुवनेश्वर। स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने, शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान को प्रोत्साहित करने और महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में एम्स भुवनेश्वर ने महत्वपूर्ण पहल की है। संस्थान के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में स्तन स्व-परीक्षण (बीएसई) बूथ का उद्घाटन किया गया। एम्स के अनुसार, यह भारत में अपनी तरह का पहला पोर्टेबल बूथ है, जहां महिलाएं स्तन की स्वयं जांच करने की प्रक्रिया सीख सकेंगी।
स्तन कैंसर जागरूकता माह के अवसर पर शुरू की गई इस पहल का उद्घाटन एम्स भुवनेश्वर के कार्यकारी निदेशक डॉ आशुतोष विश्वास ने किया। उन्होंने कहा कि स्तन कैंसर के उपचार में बेहतर परिणाम के लिए समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण है। महिलाओं को अपने स्तनों में होने वाले असामान्य बदलावों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी संदेह की स्थिति में बिना देर किए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
निजी स्थान में स्तन की स्वयं जांच करना सीख सकेंगी महिलाएं
नवनिर्मित पोर्टेबल बीएसई बूथ महिलाओं को स्तन की स्वयं जांच करने के तरीके सीखने के लिए एक निजी स्थान उपलब्ध कराता है। बूथ की दीवारों पर आसान निर्देश प्रदर्शित किए गए हैं, जिनकी मदद से महिलाएं जांच की प्रक्रिया समझ सकती हैं।
इस पहल का उद्देश्य स्तन स्वास्थ्य से जुड़े संकोच को दूर करना, महिलाओं में जागरूकता बढ़ाना और असामान्य बदलाव दिखाई देने पर चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए प्रेरित करना है। विभाग की योजना निकट भविष्य में एक स्थायी बूथ स्थापित करने की भी है।
चार वर्षों में करीब 1,000 स्तन कैंसर मरीजों का उपचार
एम्स भुवनेश्वर के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सौरव कुमार मिश्रा ने बताया कि विभाग की स्थापना के बाद पिछले चार वर्षों में लगभग 1,000 स्तन कैंसर मरीजों का उपचार किया जा चुका है। वर्तमान में हर महीने करीब 100 मरीज विभाग में पहुंच रहे हैं।
उन्होंने चिंता जताई कि बड़ी संख्या में मरीज बीमारी के उन्नत चरण में अस्पताल पहुंचते हैं। इसके साथ ही कम उम्र की महिलाओं में स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों ने भी चिंता बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में लगातार जागरूकता अभियान चलाने, बीमारी का जल्द निदान करने और समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
योग, ध्यान और संगीत से मरीजों को मिल रही मानसिक मजबूती
एम्स ने कैंसर उपचार के दौरान मरीजों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक और भावनात्मक कल्याण पर भी जोर दिया। विभाग के अनुसार, योग, ध्यान, नियमित व्यायाम, संगीत और विश्राम संबंधी गतिविधियां मरीजों को तनाव कम करने तथा उपचार की चुनौतियों से बेहतर ढंग से निपटने में मदद कर सकती हैं।
इसी उद्देश्य से विभाग की ओर से योग, ध्यान, संगीत और सामूहिक गायन के सत्र आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों से मरीजों को भावनाएं व्यक्त करने, मानसिक सुकून पाने और एक-दूसरे के अनुभवों से संबल प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
कैंसर से जूझ रहे मरीजों ने सुनाई संघर्ष और हौसले की कहानी
स्तन कैंसर जागरूकता माह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में एक भावपूर्ण संगीतमय सभा भी हुई। इसमें चिकित्सकों, कर्मचारियों और कैंसर से जूझ रहे मरीजों ने मिलकर ‘हम होंगे कामयाब एक दिन’ गीत गाया।
इस दौरान कैंसर से लड़ रहे मरीजों ने अपने अनुभव साझा किए और बीमारी के दौरान सामने आई चुनौतियों, संघर्ष तथा हौसले की कहानियां सुनाईं। कार्यक्रम का उद्देश्य मरीजों में आशा जगाना और उन्हें यह एहसास कराना था कि इस कठिन यात्रा में वे अकेले नहीं हैं।
विश्वभर में प्रत्येक वर्ष अक्टूबर को स्तन कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना, शीघ्र पहचान एवं समय पर उपचार को प्रोत्साहित करना तथा मरीजों और बीमारी से उबर चुके लोगों को सहयोग प्रदान करना है।
कार्यक्रम में एम्स के डीन डॉ दिलीप कुमार परिडा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ प्रभास रंजन त्रिपाठी, उप प्रशासनिक अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल अभिजीत सरकार, डॉ सौरव कुमार मिश्रा, डॉ सरोज दास मजूमदार सहित अन्य चिकित्सक, कर्मचारी और मरीज उपस्थित रहे।
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