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एसआई भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में ईडी की 12 ठिकानों पर छापेमारी

  •     मनी लॉन्ड्रिंग जांच में वित्तीय लेनदेन और कॉरपोरेट गठजोड़ के साक्ष्य मिलने का दावा

  •     उम्मीदवारों से 15 से 30 लाख रुपये तक वसूली का आरोप

  •     114 अभ्यर्थियों को बसों से ले जाते समय सामने आया था मामला

भुवनेश्वर। ओडिशा पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा 2024 के प्रश्नपत्र लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच तेज कर दी है। धनशोधन के इस मामले में ईडी के भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय की टीम ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 12 ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान डिजिटल साक्ष्य, वित्तीय बहीखाते और संपत्ति से संबंधित दस्तावेज मिले हैं, जिनसे कथित अपराध से अर्जित धन और कंपनियों के बीच संदिग्ध लेनदेन की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

एसआई भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक का मामला 30 सितंबर 2025 को सामने आया था। उस समय ओडिशा पुलिस ने ओडिशा-आंध्र प्रदेश सीमा के निकट इच्छापुरम के पास तीन बसों को रोका था। इन बसों में 114 अभ्यर्थी सवार थे, जिन्हें कथित तौर पर परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और आगे की तैयारी के लिए निर्धारित स्थानों पर ले जाया जा रहा था।

जांच से जुड़े आरोपों के अनुसार, प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के बदले प्रत्येक अभ्यर्थी से 15 लाख से 30 लाख रुपये तक की मांग की गई थी। कथित गिरोह ने अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और खाली चेक भी गारंटी के तौर पर अपने पास रखे थे। मामला सामने आने और व्यापक विरोध के बाद राज्य सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी थी। इसके बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मुख्य आपराधिक मामले की जांच अपने हाथ में ले ली।

परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनियां जांच के दायरे में

ईडी की जांच का प्रमुख पहलू परीक्षा संचालन में कथित अनियमितताओं और गोपनीय अभ्यर्थी डेटा के दुरुपयोग से जुड़ा है। ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड ने परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम आईटीआई लिमिटेड को सौंपी थी। इसके बाद आईटीआई लिमिटेड ने भुवनेश्वर स्थित सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल) को काम सौंपा था।

ईडी के अनुसार, एसटीपीएल के निदेशक सुरेश चंद्र नायक ने कथित तौर पर अभ्यर्थियों का गोपनीय डेटा पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को उपलब्ध कराया। इस कंपनी का संचालन शंकर प्रस्ती करते थे। जांच एजेंसी के वित्तीय विश्लेषण में परीक्षा से पहले एसटीपीएल और प्रस्ती के बीच संदिग्ध धन हस्तांतरण की बात सामने आई है। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन लेनदेन का संबंध प्रश्नपत्र लीक करने और उससे अवैध कमाई करने की कथित साजिश से था।

एसटीपीएल के शेयर हस्तांतरण पर भी उठे सवाल

जांच में एसटीपीएल के स्वामित्व और प्रबंधन में कथित अनियमितताओं का पहलू भी सामने आया है। ईडी के अनुसार, अगस्त 2023 में हुए एक समझौते के माध्यम से कंपनी के अधिकांश शेयर पीएसआईएल इंटरनेशनल लिमिटेड को हस्तांतरित किए गए थे। इस कंपनी का पूर्व नाम पटनायक स्टील इंटरनेशनल लिमिटेड था।

जांच एजेंसी का दावा है कि शेयर हस्तांतरण से संबंधित लेनदेन कंपनी रजिस्ट्रार के यहां दर्ज नहीं कराया गया था। इसके बावजूद सुरेश चंद्र नायक कथित तौर पर एसटीपीएल के संचालन प्रमुख के रूप में आईटीआई लिमिटेड के साथ संपर्क बनाए हुए थे। इससे उन्हें परीक्षा की गोपनीय मुद्रण प्रक्रिया और प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाए रखने का अवसर मिलने की आशंका जताई गई है।

कंपनी के निदेशकों की भूमिका की भी जांच

ईडी की जांच के दायरे में पीएसआईएल के निदेशक समीर राठ और स्वस्ति मिश्रा की भूमिका भी है। एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि कंपनी के प्रबंधन ढांचे में हुए कथित बदलावों की जानकारी संबंधित सरकारी अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई और परीक्षा संचालन के दौरान कंपनियों के बीच जिम्मेदारियों का वास्तविक स्वरूप क्या था।

दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू

जांच एजेंसी के अनुसार, छापेमारी में मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। मामले में संबंधित कॉरपोरेट अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन जारी किए जाने की संभावना है। जांच का मुख्य उद्देश्य कथित धनशोधन से जुड़े वित्तीय लेनदेन, प्रश्नपत्र लीक की साजिश और इसमें शामिल व्यक्तियों तथा कंपनियों की भूमिका का पता लगाना है।

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