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भारत ने सस्ती स्वच्छ ऊर्जा की क्षमता साबित की : विनीत मित्तल

  •     कहा-स्वच्छ ऊर्जा को किफायती बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई

  •     अवाडा ग्रुप के चेयरमैन ने ओडिशा में नवीकरणीय ऊर्जा निवेश की संभावनाओं पर पैनल चर्चा में रखे विचार

  •     सौर ऊर्जा के साथ बैटरी भंडारण और आधुनिक तकनीक को बताया भविष्य की जरूरत

भुवनेश्वर। भारत में स्वच्छ ऊर्जा को किफायती बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन अब अगली चुनौती इसे चौबीसों घंटे भरोसेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

अवाडा ग्रुप के चेयरमैन विनीत मित्तल ने भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (बीआरईएसई) 2026 को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि भारत को अब सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ ऊर्जा भंडारण और आधुनिक तकनीक पर भी विशेष ध्यान देना होगा, ताकि स्वच्छ ऊर्जा हर समय उपलब्ध हो सके।

नई दिल्ली में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो-2026 में ओडिशा में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर आयोजित पैनल चर्चा को संबोधित करते अवाडा ग्रुप के चेयरमैन विनीत मित्तल ने कहा कि आने वाले दशकों में ऊर्जा सुरक्षा का आधार केवल तेल और गैस के भंडार पर नियंत्रण नहीं, बल्कि प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों का बेहतर उपयोग, भंडारण और प्रबंधन करने की क्षमता होगी। भारत के पास प्रचुर मात्रा में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा के संसाधन, विशाल घरेलू बाजार और उद्यमशीलता की क्षमता मौजूद है। इन खूबियों के आधार पर देश स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तकनीकी और औद्योगिक विकास कर सकता है।

मित्तल ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केवल विचार-विमर्श के मंच नहीं हैं, बल्कि निवेश के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नवाचार के जरिए स्वच्छ ऊर्जा को भरोसेमंद बनाने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से इसे आम लोगों तक पहुंचाने के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। भारत की वास्तविक उपलब्धि केवल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों को सस्ती और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता से तय होगी।

सौर ऊर्जा निर्माण में पूरी मूल्य शृंखला विकसित करने पर जोर

उन्होंने कहा कि भारत ने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सौर बिजली उत्पादन की क्षमता साबित की है। अब देश को सौर ऊर्जा तकनीक के निर्माण में भी आत्मनिर्भर बनना होगा। इसके लिए पॉलीसिलिकॉन, इंगट, वेफर, उच्च दक्षता वाले सोलर सेल, मॉड्यूल, ग्लास, बैटरी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा प्रबंधन प्रणालियों सहित पूरी उत्पादन शृंखला विकसित करना जरूरी है।

उन्होंने अवाडा ग्रुप के निवेश का उदाहरण देते हुए बताया कि कंपनी उन्नत टॉपकॉन सोलर सेल, एकीकृत सौर विनिर्माण, बैटरी भंडारण और ग्रीन फ्यूल के क्षेत्र में क्षमताएं विकसित कर रही है। भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा की सफलता के लिए बेहतर दक्षता, अधिक विश्वसनीयता, कम लागत और निरंतर तकनीकी नवाचार आवश्यक होंगे।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन से विकासशील देशों को लाभ

मित्तल ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की भूमिका पर कहा कि ऊर्जा केवल एक व्यावसायिक वस्तु नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन का आधार है। निजी क्षेत्र को विकासशील देशों में सौर ऊर्जा उत्पादन, बैटरी भंडारण, सस्ती वित्तीय व्यवस्था, स्थानीय उद्यमिता और रखरखाव की सुविधाओं को एक साथ जोड़कर समाधान उपलब्ध कराने चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर और पीएम-कुसुम योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने आम नागरिकों और किसानों को ऊर्जा अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदार बनाया है। भविष्य में घरों पर सौर संयंत्रों के साथ बैटरी भंडारण और स्मार्ट हाइब्रिड इन्वर्टर की सुविधा जोड़कर दिन में उत्पादित बिजली को शाम के समय भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जरूरत और नियामकीय अनुमति के अनुसार ऐसे घर विद्युत ग्रिड को भी सहयोग दे सकते हैं।

निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारना सबसे बड़ी चुनौती

मित्तल ने कहा कि भारत में स्वच्छ ऊर्जा निवेश की संभावनाओं की कमी नहीं है। असली चुनौती निवेश प्रस्तावों को समयबद्ध तरीके से वित्तीय रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं में बदलने की है। इसके लिए स्थिर नीतियां, निवेशकों का भरोसा और बेहतर वित्तीय ढांचा जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र को वैश्विक निवेशकों, पेंशन फंड, विकास वित्त संस्थानों और तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी बढ़ानी चाहिए। केवल निवेश घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें कारखानों, बिजली पारेषण नेटवर्क, ऊर्जा परियोजनाओं और आम उपभोक्ताओं के लिए सस्ती बिजली में बदलना महत्वपूर्ण है। भारत के सामने अगली बड़ी चुनौती स्वच्छ ऊर्जा को चौबीसों घंटे भरोसेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

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