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नरेंद्र पुष्करिणी में देव विग्रहों की नौका यात्रा
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42 दिनों तक चलेगा पावन उत्सव
पुरी। पवित्र अक्षय तृतीया के अवसर पर जगन्नाथ धाम, पुरी में आज से चंदन यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया। यह पावन उत्सव भगवान को ग्रीष्मकाल में शीतलता प्रदान करने की भावना से मनाया जाता है, जिसमें चंदन और जल का विशेष महत्व होता है।
इस दौरान श्रीमंदिर के देव विग्रहों को भव्य शोभायात्रा के साथ नरेंद्र पुष्करिणी ले जाया जाता है, जहां पारंपरिक ‘चाप खेळा’ (नौका यात्रा) का आयोजन होता है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस दिव्य अनुष्ठान का दर्शन करते हैं और भक्ति में लीन रहते हैं।
चंदन यात्रा के पहले 21 तक बाहरी देवताओं को मंदिर से बाहर निकालकर नरेंद्र पुष्करिणी में नौका विहार कराया जाता है। इस दौरान पूरा वातावरण मंत्रोच्चार, संगीत और भक्ति से गूंज उठता है।
इसके बाद अगले 21 दिनों तक ‘भीतरा चंदन यात्रा’ का आयोजन होता है, जिसमें मंदिर परिसर के भीतर ही सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। पुजारी पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर इस उत्सव की आध्यात्मिक गरिमा को बनाए रखते हैं।
चंदन यात्रा का ओडिशा की संस्कृति और आस्था में विशेष स्थान है। चंदन, जल और दिव्य शोभायात्राओं का यह संगम पवित्रता, श्रद्धा और गर्मी से राहत का प्रतीक माना जाता है। यह उत्सव जगन्नाथ संस्कृति और परंपरा को सशक्त बनाते हुए देशभर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
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