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रथयात्रा की तैयारियां शुरू
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कृषि अनुष्ठान ‘अखी मुठी अनुकूल’ से नए सीजन की शुरुआत
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पुरी में रथ निर्माण और चंदन यात्रा ने बढ़ाया उत्साह
भुवनेश्वर/पुरी। पवित्र अक्षय तृतीया का पर्व 20 अप्रैल 2026 को पूरे ओडिशा में श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। हिंदू कैलेंडर के सबसे शुभ दिनों में से एक माने जाने वाले इस पर्व को समृद्धि, सफलता और नए शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
राज्यभर में लोगों ने पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया, जो ओडिशा की समृद्ध और समावेशी सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
‘अखी मुठी अनुकूल’ से कृषि सीजन की शुरुआत
इस अवसर पर ग्रामीण इलाकों में किसानों ने पारंपरिक ‘अखी मुठी अनुकूल’ अनुष्ठान किया, जो कृषि चक्र की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है। किसान इस दिन अपने खेतों में बीज बोकर अच्छी फसल की कामना करते हैं। कृषि से गहरे जुड़ाव के कारण अक्षय तृतीया को किसानों का पर्व भी कहा जाता है।
पुरी में रथयात्रा की तैयारी का शुभारंभ
पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में इस दिन विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा के लिए रथ निर्माण कार्य का शुभारंभ हुआ। यह वार्षिक महोत्सव लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है और भगवान जगन्नाथ के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता है।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष रणनीति लागू की, वहीं स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखते हुए ट्रैफिक नियंत्रण और निगरानी बढ़ाई। इन व्यवस्थाओं के चलते श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण मिला। अक्षय तृतीया ओडिशा की सांस्कृतिक परंपराओं, आध्यात्मिक मूल्यों और कृषि जीवनशैली का प्रतीक है। यह पर्व समाज को एकजुट कर आशा, श्रद्धा और समृद्धि का संदेश देता है, जिससे इसकी महत्ता आज भी बरकरार है।
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