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तनिष्क और चांदी भंडार ने नवभारत समेत प्रमुख अखबारों को बनाया निशाना
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प्रिंट मीडिया की साख का गलत तरीके से उठा रहे हैं फायदा
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पाठकों को भ्रमित करने के लिए बांटी जा रही फूल पेज की फर्जी प्रचार सामग्री
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मीडिया संस्थानों ने जताई कड़ी आपत्ति, कानूनी रास्ता करेंगे अख्तियार
भुवनेश्वर। अक्षय तृतीया जैसे पवित्र पर्व से पहले ब्रांडेड ज्वेलरी विक्रेताओं द्वारा अपनाए जा रहे प्रचार के रास्ते और अनैतिक रणनीतियों ने मीडिया जगत में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। चांदी भंडार और तनिष्क जैसे नामी ज्वेलरी ब्रांडों पर आरोप है कि वे प्रिंट मीडिया संस्थानों की साख का दुरुपयोग कर पाठकों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
शनिवार को तनिष्क और चांदी भंडार ने ओडिशा से प्रकाशित दैनिक हिन्दी समाचार पत्र नवभारत समेत कई प्रमुख अखबारों को निशाना बनाया है।
बिक्री के सीजन में अक्सर करते हैं ऐसी हरकत
अक्सर बिक्री का सीजन आते ही ज्वेलरी कंपनियां अखबारों के लेआउट की नकल कर फुल पेज प्रचार सामग्री छपवा रहे हैं और प्रतिदिन प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र के अंदर उसे रखकर पाठकों के बीच वितरित किया जा रहा है। इस तरह की सामग्री का उद्देश्य उपभोक्ताओं को आकर्षित करना और बिक्री बढ़ाना है। चूंकी अखबारों में आज पाठकों की विश्वस्नीयता बनी हुई है, इसलिए ये अखबारों की साख का फायदा उठा रहे हैं, जबकि इनको विज्ञापन देना चाहिए।
मीडिया संस्थानों और सरकार को राजस्व का भारी नुकसान
ब्रांडेड ज्वेलरी विक्रेताओं के इस कदम से मीडिया संस्थानों को ना सिर्फ राजस्व का भी नुकसान हो रहा है, अपितु सरकार को अप्रत्यक्ष रूप से राजस्व की हानि पहुंचा रहे हैं। अखबारों को विज्ञापन देने से राज्य सरकार को जीएसटी के रूप में राजस्व प्राप्त होता है।
ब्रांड की साख के साथ खिलवाड़ बर्दास्त नहीं
मीडिया संस्थानों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह न केवल ब्रांड की साख के साथ खिलवाड़ है, बल्कि पाठकों के विश्वास को भी ठेस पहुंचाने का प्रयास है। कई संस्थानों ने इस पर कानूनी कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के दौरान इस तरह की भ्रामक रणनीतियां उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ हैं और इस पर सख्त निगरानी की आवश्यकता है। वहीं, पाठकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी प्रचार सामग्री पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।
बौद्धिक संपदा अधिकार का घोर उल्लंघन
प्रिंट मीडिया के भीतर इस तरह की विज्ञापन सामग्री को इनसेट करना स्पष्ट रूप से बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपी राइट्स) के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। भले ही संबंधित कंपनियां अखबार का लोगो प्रयोग नहीं कर रही हैं, लेकिन अखबार के अंदर अपने विज्ञापन को इस तरह शामिल करना कि वह मूल सामग्री का हिस्सा लगे, ब्रांड की पहचान और प्रस्तुति के साथ छेड़छाड़ है। यह न केवल पाठकों को भ्रमित करता है, बल्कि मीडिया संस्थान की साख और विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है, जिससे यह मामला गंभीर कानूनी विवाद का रूप ले सकता है।
नियामक प्रक्रियाओं में जटिलताएं उत्पन्न
इसके अलावा, अखबारों द्वारा घोषित पृष्ठ संख्या, जैसे 12 पेज, ऐसी गतिविधियों के कारण अनियंत्रित रूप से बढ़ जाती है, जिससे लेखा-परीक्षा (ऑडिट) और नियामक प्रक्रियाओं में जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। यह स्थिति विभिन्न विभागों के लिए भी चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि इससे पारदर्शिता और अनुपालन पर सवाल खड़े होते हैं।
अखबारों में इनसेट विज्ञापन सामग्री पर लगे सख्त प्रतिबंध
इसलिए आवश्यक है कि अखबारों में इस प्रकार की इनसेट विज्ञापन सामग्री पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए, अन्यथा कोई भी संस्था मनमाने तरीके से सामग्री प्रकाशित कर गंभीर और संवेदनशील परिस्थितियां पैदा कर सकती है।
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