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बीजद ने सिजिमाली मामले में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की

  •     आदिवासियों पर कथित अत्याचारों की निंदा

भुवनेश्वर। सिजिमाली क्षेत्र में आदिवासी समुदायों के खिलाफ रायगड़ा जिला प्रशासन द्वारा की गई कथित कार्रवाई की निंदा करते हुए विपक्षी बीजू जनता दल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

भुवनेश्वर स्थित पार्टी कार्यालय शंख भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राज्य सरकार पर आदिवासी विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि यह घटना उसी का परिणाम है।

रायगड़ा जिला बीजद अध्यक्ष जगन्नाथ सारका ने कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पार्टी प्रतिनिधिमंडल प्रभावित क्षेत्र में गया और स्थानीय लोगों से बातचीत कर स्थिति को समझा। उनके अनुसार ग्रामीणों ने बताया कि वे एक खनन कंपनी द्वारा सड़क निर्माण के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके दौरान प्रशासन ने कथित रूप से बल प्रयोग किया।

सारका ने कहा कि आदिवासियों के साथ किया गया अत्याचार अत्यंत निंदनीय है। औद्योगिक विकास, स्थानीय आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी की कीमत पर नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम सभा की प्रक्रिया और आवश्यक अनुमतियों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए ताकि आदिवासी हित सुरक्षित रह सकें।

कोरापुट जिला बीजद अध्यक्ष झिन्ना हिक्का ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का व्यवहार किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे और क्षेत्र में खनन गतिविधियों को तेज करने के प्रयासों के बीच पेसा अधिनियम और वन कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया जा रहा था।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि रात के समय जब ग्रामीण सो रहे थे, तब बिजली आपूर्ति बंद कर प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई। यह घटना राज्य सरकार के आदिवासी विरोधी रुख को दर्शाती है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य के मुख्यमंत्री और भारत की राष्ट्रपति दोनों आदिवासी समुदाय से आते हैं, फिर भी इस घटना में न्याय सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील की गई है।

सस्मित पात्र ने जुएल ओराम को लिखा पत्र

बीजद के राज्यसभा सांसद डॉ सस्मित पात्र ने ओडिशा के सिजिमाली क्षेत्र में चल रहे आदिवासी विवाद को लेकर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। डॉ पात्र ने अपने पत्र में विरोध कर रहे आदिवासी समुदायों के खिलाफ कथित अंधाधुंध पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने विरोध के दौरान आदिवासियों के घायल होने पर चिंता जताते हुए उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

तीन प्रमुख मुद्दों को रेखांकित किया

उन्होंने तीन प्रमुख मुद्दों को रेखांकित किया, पहला, पुलिस की कथित ज्यादतियों से आदिवासी समुदायों की सुरक्षा; दूसरा, खनन गतिविधियों में ग्राम सभाओं की स्वतंत्र और सूचित सहमति सुनिश्चित करना; और तीसरा, पेसा कानून तथा वनाधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों का सख्ती से पालन।

प्रभावित समुदायों के बीच विश्वास बहाल करें

डॉ पात्र ने मंत्री से अपील की कि वे ओडिशा के मुख्यमंत्री के साथ इस मामले में संवाद स्थापित कर स्थिति को नियंत्रित करें और प्रभावित समुदायों के बीच विश्वास बहाल करें। उन्होंने कहा कि ओडिशा से जुड़ाव और केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री के रूप में जुएल ओराम की भूमिका इस मामले में तनाव कम करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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