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अपराजिता के पत्र से मेट्रो परियोजना पर घिरी सरकार

  •     मंत्री कृष्ण चंद्र पात्र ने दी सफाई

  •     टकराहट के बाद भुवनेश्वर मेट्रो प्रोजेक्ट पर फिर छिड़ी बहस

  •     सांसद अपराजिता ने कहा-कुछ प्रोजेक्ट लाभ के लिए नहीं, जनता के हित के लिए होते हैं

  •     सरकार बोली-प्रोजेक्ट बंद नहीं, समीक्षा के लिए रोका गया

  •     अपराजिता षाड़ंगी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, मेट्रो प्रोजेक्ट पुनर्विचार की अपील

भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में मेट्रो परियोजना को स्थगित करने के राज्य सरकार के फैसले पर सियासी बहस तेज हो गई है। भाजपा सांसद अपराजिता षाड़ंगी के कड़े पत्र के बाद सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। अपराजिता ने स्पष्ट कहा कि कुछ परियोजनाएं मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि जनहित और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए लागू की जाती हैं। बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने सफाई दी है कि मेट्रो प्रोजेक्ट को खत्म नहीं किया गया है, बल्कि विस्तृत समीक्षा के लिए अस्थायी रूप से रोका गया है।

भुवनेश्वर की भाजपा सांसद अपराजिता षाड़ंगी ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर राज्य कैबिनेट के भुवनेश्वर मेट्रो प्रोजेक्ट को स्थगित करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती आबादी, बढ़ते ट्रैफिक और शहरी विस्तार के बीच मेट्रो जैसे दीर्घकालिक समाधान की शहर को बेहद जरूरत है।

अपराजिता ने एक्स पर पत्र साझा किया है, जिससे मोहन माझी की सरकार घिर गई है। उन्होंने कहा कि भुवनेश्वर, कटक, जटनी और खुर्दा क्षेत्र आने वाले वर्षों में 20-25 लाख से अधिक आबादी वाले महानगरीय क्षेत्र में बदलने वाले हैं, ऐसे में हाई-कैपेसिटी मेट्रो सिस्टम बेहद आवश्यक है।

प्रोजेक्ट बंद करने के फैसले पर सवाल, कई कई प्रमुख तर्क

तेजी से शहरी विस्तार: भुवनेश्वर-कटक-खुर्दा का संयुक्त शहरी क्षेत्र मेट्रो योग्य आबादी की सीमा पार करने वाला है।

आर्थिक और पर्यटन बढ़ावा: लिंगराज मंदिर, खंडगिरि-उदयगिरि, धौली, नंदनकानन, ISKCON जैसे प्रमुख स्थलों तक बेहतर पहुंच से राज्य की छवि निवेश और पर्यटन के लिए मजबूत होगी।

राष्ट्रीय उदाहरण: देश के 18 शहरों में मेट्रो चल रही है, 16 में निर्माणाधीन है और 12 में योजना बन रही है, जिसमें कई शहरों की आबादी भुवनेश्वर से कम है।

वित्तीय हानि: अब तक 274 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं, प्रोजेक्ट छोड़ने से और नुकसान होगा।

लाभ से ज्यादा सार्वजनिक हित: मेट्रो प्रोजेक्ट देशभर में सब्सिडी आधारित होते हैं और इन्हें दीर्घकालिक जन-उपयोग के लिए देखा जाता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संदेश का हवाला दिया

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने स्वतंत्रता दिवस संदेश में मेट्रो नेटवर्क को शहरीकरण की चुनौतियों का समाधान बताया है, ऐसे में ओडिशा पीछे क्यों रहे।

अपने पूर्व प्रयासों का उल्लेख किया

अपने पूर्व प्रयासों का उल्लेख करते हुए षाड़ंगी ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पत्र लिखकर इस परियोजना की शुरुआत का आग्रह किया था और 2024 में भुवनेश्वर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट लिमिटेड की प्रगति की समीक्षा भी की थी।

परियोजना स्थगित करने के निर्णय पर सवाल उठाया

उन्होंने तर्क दिया कि परियोजना को स्थगित करने का निर्णय भविष्य की शहरी आवश्यकताओं के समग्र आकलन पर आधारित नहीं प्रतीत होता, विशेषकर तब जब भुवनेश्वर और कटक एकीकृत शहरी क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक परिवहन प्रणाली पर्यटन को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और शहर की छवि सुधारने के लिए आवश्यक है।

सरकार ने रखा अपना पक्ष

राज्य के आवास एवं शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र पात्र ने स्पष्ट किया कि मेट्रो प्रोजेक्ट रद्द नहीं किया गया है, बल्कि विस्तृत समीक्षा के लिए अस्थायी रूप से रोका गया है। उन्होंने कहा कि टेस्ट रन के दौरान भारी ट्रैफिक जाम से आम लोग परेशान हुए। लंबे समय तक काम जारी रहने पर स्थिति और बिगड़ सकती थी।

व्यापक मोबिलिटी प्लान हो रहा तैयार

राज्य के आवास एवं शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र पात्र ने कहा कि भुवनेश्वर-कटक-पुरी-पारादीप क्षेत्र के लिए एक व्यापक मोबिलिटी प्लान तैयार किया जा रहा है। इंटर-मिनिस्टेरियल कमेटी नीति, यात्री संख्या और वित्तीय व्यवहार्यता की समीक्षा कर रही है। मेट्रो कॉर्पोरेशन बंद नहीं हुआ है, उसका कार्यालय कार्यरत है।

मोहन की कैबिनेट ने दी थी 273.51 करोड़ को मंजूरी

4 अप्रैल 2026 को हुई बैठक में कैबिनेट ने दिसंबर 2025 तक प्रोजेक्ट पर खर्च हुए 273.51 करोड़ को मंजूरी दी और डीएमआरसी के साथ समझौता समाप्त किया। समिति ने बताया कि राष्ट्रीय मेट्रो रेल नीति 2017 के कई प्रावधानों का पालन नहीं हुआ। अनुमानित यात्री संख्या कम थी तथा भारी परिचालन नुकसान की आशंका थी। पहले चरण में एयरपोर्ट से त्रिशूलिया तक 16 स्टेशनों वाला एलीवेटेड कॉरिडोर बनाया जाना था, जिससे कटक-भुवनेश्वर जुड़ते।

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