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मदुरै के बाद ओडिशा में ‘कस्टोडियल डेथ’ पर कोर्ट का बड़ा आदेश

  •     ‘कस्टोडियल डेथ’ के 10 साल बाद दो सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी व 4 होमगार्ड गिरफ्तार

  •     अदालत ने जमानत खारिज कर सभी को न्यायिक हिरासत में भेजा

  •     2016 में नरसिंहपुर थाना क्षेत्र में हुई मौत

कटक। तमिलनाडु के मदुरै के बाद ओडिशा के कटक जिले में लगभग एक दशक पुराने कथित कस्टोडियल डेथ मामले में पुलिस ने दो सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों और चार होमगार्ड को गिरफ्तार किया है। यह मामला मालिसाही गांव के 44 वर्षीय निवासी सरोज सेनापति उर्फ अकुला की मौत से जुड़ा है, जो 9 दिसंबर 2016 को नरसिंहपुर थाना क्षेत्र में हिरासत के दौरान हुई थी।

गिरफ्तार आरोपियों में सेवानिवृत्त एएसआई भगन साहू, सेवानिवृत्त हवलदार प्रमोद कुमार पात्र, तथा होमगार्ड जोगीनाथ नायक, भिखारी नायक, महेश्वर देवता और धर्मराज राणा शामिल हैं। इनमें से देवता और राणा अभी सेवा में हैं। सभी आरोपियों को मंगलवार को अदालत में पेश किया गया, जहां उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

मवेशी चराने को लेकर हुआ था विवाद

मामला उस समय शुरू हुआ, जब एक महिला ने मवेशी चराने को लेकर हुए विवाद में सरोज सेनापति पर हमला करने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस पूछताछ के दौरान उनके साथ कथित रूप से बर्बर मारपीट और यातना की गई। गंभीर हालत में उन्हें पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र, फिर एससीबी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई।

कई धाराओं के तहत दर्ज था मामला

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के तहत एक मामला दर्ज किया गया, जिनमें धारा 448 (गृह-अतिक्रमण), 342 (अवैध परिरोध), 341 (अवैध अवरोध), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 506 (आपराधिक धमकी), 302 (हत्या) और 34 (सामान्य आशय) शामिल हैं। जांच में ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के खिलाफ गलत तरीके से हिरासत में लेने, हमला करने, धमकी और हत्या के सबूत सामने आए थे।

मानवाधिकार आयोग ने लिया था स्वत: संज्ञान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की थी, जबकि ओडिशा मानवाधिकार आयोग ने भी कटक एसपी से रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस ने पहले आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया था कि सेनापति ने खुद ही पुलिस पर हमला किया था और झड़प में घायल हुआ था।

गौरतलब है कि यह गिरफ्तारी उस घटना के एक दिन बाद हुई है, जब तमिलनाडु के मदुरै में 2020 में पिता-पुत्र की कस्टोडियल हत्याओं के मामले में नौ पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड सुनाया गया।

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