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उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री हुए शामिल
भुवनेश्वर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि पुरी, उज्जैन और काशी भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख केंद्र हैं, जहां विज्ञान और आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। वे बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन (अवन्तिका) में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के दौरान यह बात कही। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के कार्य़ालय द्वारा यह जानकारी दी गई है।
अपने दौरे के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी के साथ मिलकर ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2026-27’ की वेबसाइट और पुस्तिका का भी विमोचन किया।
प्रधान ने कहा कि उज्जैन केवल एक स्थान नहीं, बल्कि समय गणना का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने उज्जैन को पुनः ‘ग्लोबल मेरिडियन’ के रूप में स्थापित करने के प्रयासों को प्राचीन भारतीय विज्ञान को आधुनिक युग से जोड़ने वाला कदम बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारत अब औपनिवेशिक शिक्षा मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी मूल ज्ञान परंपरा और भाषाओं से जुड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश एक आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने युवाओं में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘उज्जैन साइंस सेंटर’ का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह केंद्र युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और जिज्ञासा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि उज्जैन की आध्यात्मिक परंपरा और आधुनिक विज्ञान का यह संगम युवाओं को ज्ञानवान और संस्कारित बनाएगा।
दौरे के दौरान उन्होंने श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन किए और गो-सेवा भी की। उन्होंने गो-सेवा को भारतीय संस्कृति में करुणा और संवेदनशीलता का प्रतीक बताया।
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