-
साउथ कोस्ट रेलवे में शामिल करने के प्रस्ताव पर भड़के विपक्षी दल
-
बीजद और कांग्रेस ने फैसले को बताया ओडिशा के हितों के खिलाफ
भुवनेश्वर। ओडिशा में विभिन्न राजनीतिक दलों ने रेलवे बोर्ड के उस निर्णय का कड़ा विरोध किया है, जिसमें पालासा–इच्छापुरम रेल खंड को ईस्ट कोस्ट रेलवे के अधिकार क्षेत्र से हटाकर प्रस्तावित साउथ कोस्ट रेलवे जोन में शामिल करने की बात कही गई है। दलों ने इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
यह रेल खंड वर्तमान में ईस्ट कोस्ट रेलवे के खुर्दा रोड मंडल के अंतर्गत आता है, लेकिन रेलवे बोर्ड की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार इसे साउथ कोस्ट रेलवे के विशाखापट्टनम मंडल में शामिल करने का प्रस्ताव है।
सस्मित पात्र ने रेल मंत्री को पत्र लिखा
बीजद के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्र ने इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि ओडिशा कोयला, खनिज और औद्योगिक उत्पादन के माध्यम से भारतीय रेलवे के माल राजस्व में बड़ा योगदान देता है, ऐसे में इस तरह के बदलाव से राज्य को वित्तीय और प्रशासनिक नुकसान हो सकता है।
ओडिशा की भूमिका कमजोर होगी
पात्र ने चेतावनी दी कि अधिक राजस्व वाले रेल खंडों को ईस्ट कोस्ट रेलवे से हटाने से रेलवे योजना और प्राथमिकताओं में ओडिशा की भूमिका कमजोर हो सकती है, साथ ही प्रशासनिक दक्षता पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि राज्य से जुड़े किसी भी फैसले से पहले जनप्रतिनिधियों और हितधारकों से परामर्श किया जाए।
राज्य के साथ सौतेला व्यवहार – कांग्रेस
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे राज्य के साथ सौतेला व्यवहार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद ओडिशा को बुनियादी ढांचे के विकास में नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि उसकी महत्वपूर्ण संपत्तियों को अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है।
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि साउथ कोस्ट रेलवे जोन के अधिकार क्षेत्र की समीक्षा की गई है और संशोधित योजना के तहत पालासा–इच्छापुरम खंड को विशाखापट्टनम मंडल में शामिल किया जाएगा।
भाजपा के भीतर भी चिंता सामने आई
इस फैसले को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर भी चिंता सामने आई है। ब्रह्मपुर के सांसद प्रदीप कुमार पाणिग्राही ने इस रेल खंड को दक्षिण ओडिशा की “आर्थिक धुरी” बताते हुए कहा कि इसके स्थानांतरण से लॉजिस्टिक्स और राजस्व प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है और ब्रह्मपुर में नया रेलवे मंडल बनाने का प्रस्ताव भी दिया है। भाजपा विधायक पूर्ण चंद्र सेठी ने कहा कि विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही रेल मंत्री से मिलकर इस निर्णय की समीक्षा की मांग करेगा।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
