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अब आंगनबाड़ी केंद्र मिलेंगे शिशु वाटिका स्कूलों में

  •     खड़ी छुआं दिवस पर प्रारंभिक शिक्षा को नई दिशा

  • -मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने की बड़ी घोषणा

भुवनेश्वर। राज्यस्तरीय खड़ी छुआँ दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ओडिशा में प्रारंभिक शिक्षा प्रणाली में बड़ा परिवर्तन लाने वाली घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से शिशु वाटिका स्कूलों में विलय करेगी, ताकि बच्चों को एक ही परिसर में बेहतर, समेकित और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा और पोषण सुविधाएं मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि बच्चों को टूटी-फूटी कच्ची झोपड़ियों या संकुचित आंगनवाड़ी केंद्रों में न रखकर ऐसे वातावरण में दिया जाए जहां शिक्षा, पोषण और देखभाल, तीनों एक साथ हों। उन्होंने जोर दिया कि एक ही छत के नीचे, एकीकृत प्रारंभिक शिक्षा मॉडल ही बच्चों के समग्र विकास का भविष्य है।

हर गांव में मॉडल स्कूल बनाने की योजना

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि अब राज्य के हर गांव में एक मॉडल स्कूल विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण बच्चों को शहरों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में किसी तरह की असमानता न रहे।

6 करोड़ की लागत से बनेगा नया प्राथमिक विद्यालय

मुख्यमंत्री ने बताया कि गोदाबरिश मिश्र प्राथमिक विद्यालय 5 एकड़ भूमि पर 6 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। यह स्कूल ग्रामीण शैक्षणिक मॉडल का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा और आने वाले वर्षों में इसे अन्य जिलों में भी दोहराया जाएगा।

राज्य में शिक्षा सुधार को नई गति

ओडिशा सरकार लंबे समय से प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने पर काम कर रही है। शिशु वाटिका मॉडल को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (नेप) के अनुरूप माना जा रहा है और इसे आधुनिक बाल–विकास ढांचे के रूप में पेश किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के साथ राज्य में शिक्षा सुधार की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।

17 मार्च से भेजे गए मुख्यमंत्री द्वारा हस्ताक्षरित आमंत्रण पत्र

शिशु वाटिका और कक्षा-1 में प्रवेश लेने वाले बच्चों को 17 मार्च से मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर वाले आमंत्रण पत्र भेजे गए, ताकि हर परिवार इस अभियान से जुड़ सके।

 ‘जादुई पिटारा’ से बच्चे सीखेंगे खेल-खेल में

कार्यक्रम के तहत कहानी, कला और खेल-आधारित शिक्षण पर विशेष बल दिया गया है। इसका मुख्य आकर्षण है ‘जादुई पिटारा’, जो डीआईईटी द्वारा विकसित एक आधुनिक शिक्षण किट है। इस किट में  खिलौने, पहेलियां, कहानी कार्ड, पोस्टर तथा अन्य शिक्षण-सामग्री शामिल हैं, जो बच्चों की आधारभूत साक्षरता और गणन कौशल को मजबूत करेंगे। यह किट शिशु वाटिका से कक्षा-5 तक के सभी विद्यालयों में उपलब्ध कराई जाएगी।

बच्चों का हाथ पकड़कर कराया कक्षा में प्रवेश

स्कूल प्रवेशोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं बच्चों का हाथ पकड़कर उन्हें कक्षा तक पहुंचाया और चॉक से लिखवाकर उनके शिक्षा-यात्रा की शुभ शुरुआत कराई। उन्होंने बच्चों को शिक्षा अपनाने, जिज्ञासु बने रहने और सीखने की प्रक्रिया का आनंद लेने के लिए प्रेरित किया।

क्या बदलेगा इस फैसले से?

–    आंगनबाड़ी और शिशु वाटिका एक प्रणाली में जुड़ेंगे।

–    बच्चों को बेहतर बुनियादी ढांचा, खेल क्षेत्र, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा एक साथ।

–    ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर मजबूत होगा।

–    शिक्षिकाओं और सहायिकाओं के प्रशिक्षण में सुधार होगा।

–    माता–पिता को बच्चों की देखभाल के लिए एक ही जगह पर सभी सुविधाएं मिलेंगी।

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