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अनुगूल में सड़क अवसंरचना सुधार की मांग

  •     मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप के लिए केंद्रीय मंत्री ने लिखा पत्र

  •     छेंडीपदा–अनुगूल राज्य राजमार्ग-63 के चौड़ीकरण, बाईपास निर्माण और छेंडीपदा–जरपड़ा सड़क के विस्तार के किया अनुरोध

भुवनेश्वर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से अनुगूल जिले में कोयला परिवहन और औद्योगिक ढांचे को सुदृढ़ करने हेतु व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने एक पत्र लिखकर छेंडीपदा–अनुगूल राज्य राजमार्ग-63 के चौड़ीकरण, बाईपास निर्माण तथा छेंडीपदा–जरपड़ा सड़क के विस्तार के लिए अनुरोध किय़ा है।

अपने पत्र में प्रधान ने उल्लेख किया है कि अनुगूल जिला राज्य के केंद्रीय भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र है, जिसकी जनसंख्या लगभग 15 लाख है और जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 5 प्रतिशत योगदान देता है। कोयला संपदा से समृद्ध इस जिले में वर्तमान में 116 मिलियन टन वार्षिक कोयला उत्पादन होता है, जो 2033 तक बढ़कर 250-300 मिलियन टन होने का अनुमान है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जिले में नालको का स्मेल्टर प्लांट, एनटीपीसी कणिहा, तालचेर सुपर थर्मल पावर स्टेशन तथा महानदी कोल फिल्ड्स जैसी प्रमुख औद्योगिक और ऊर्जा इकाइयाँ स्थित हैं, जो राज्य की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ हैं।

विशेष रूप से छेंडीपदा तहसील क्षेत्र देश के कुल कोयला भंडार का लगभग एक-षष्ठांश हिस्सा समेटे हुए है, जिससे इसकी रणनीतिक महत्ता और बढ़ जाती है। हालांकि, वर्तमान सड़क अवसंरचना—विशेषकर राज्य राजमार्ग-63 और छेंडीपदा-जरपड़ा मुख्य जिला सड़क-बढ़ते कोयला परिवहन के लिए अपर्याप्त साबित हो रही है। इन मार्गों के घनी आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरने के कारण यातायात जाम, दुर्घटनाओं और स्थानीय लोगों में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

समाधान के तौर पर प्रधान ने दो प्रमुख प्रस्ताव दिए हैं। पहला, छेंडीपदा से अनुगूल तक राज्य राजमार्ग-63 को दो लेन से चार लेन में विस्तारित करने के साथ-साथ आबादी वाले क्षेत्रों में बाईपास निर्माण किया जाए। दूसरा, छेंडीपदा–जरपड़ा मुख्य सड़क का चौड़ीकरण किया जाए, जो खनन क्षेत्रों को राष्ट्रीय राजमार्ग-55 और रेलवे कॉरिडोर से जोड़ती है।

उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से राज्य राजमार्ग-63 पर यातायात का दबाव कम होगा, वैकल्पिक परिवहन मार्ग विकसित होगा और कोयला परिवहन अधिक सुगम बनेगा। साथ ही, बेहतर सड़क संपर्क से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

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