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राज्यस्तरीय सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दिलाई ईमानदारी की शपथ; सितंबर 2026 तक दोषसिद्धि दर बढ़कर 65 प्रतिशत पहुंची
भुवनेश्वर, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी कि अब शासन व्यवस्था बंद कमरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार सीधे जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुन रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का जनसुनवाई कार्यक्रम जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
मंगलवार को लोकसेवा भवन के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राज्यस्तरीय सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और उपस्थित लोगों को ईमानदारी एवं सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाई। उन्होंने भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीक और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुनवाई कार्यक्रम के माध्यम से लोग सीधे मंत्रियों और मुख्यमंत्री के समक्ष भ्रष्टाचार से जुड़ी अपनी शिकायतें रख रहे हैं। इन शिकायतों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई भी की जा रही है।
सुशासन में सतर्कता विभाग की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि सतर्कता विभाग सुशासन की आंख और कान है। सुशासन का अर्थ केवल नीतियां और योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगे और सरकारी धन जिस उद्देश्य तथा जिन लाभार्थियों के लिए आवंटित किया गया है, वह पूरी तरह उन तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि ओडिशा के विकास के अनुरूप राज्य सरकार सतर्कता व्यवस्था को अधिक सक्षम और मजबूत बनाने के लिए व्यापक कदम उठा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनधन-आधार-मोबाइल व्यवस्था का उल्लेख करते हुए माझी ने कहा कि तकनीक के उपयोग से जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिली है। उन्होंने इस व्यवस्था को गरीबों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ तीन स्तरीय रणनीति
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति पर काम कर रही है। इसके तहत खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई, पद और कार्यकाल की परवाह किए बिना कानूनी कदम उठाना तथा भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार अधिकारियों को दोषसिद्धि तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने सतर्कता विभाग की कार्यप्रणाली पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि विभाग इन रणनीतियों को निर्भीकता और पेशेवर तरीके से लागू कर रहा है।
41 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त, 91 की पेंशन बंद
भ्रष्टाचार के मामलों में की गई कार्रवाई का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में ओडिशा सतर्कता विभाग ने एक आईएएस अधिकारी, मुख्य अभियंता स्तर के आठ अधिकारियों, दो प्रभागीय वन अधिकारियों, आबकारी और राज्य परिवहन प्राधिकरण के संयुक्त आयुक्तों, तीन खनन उपनिदेशकों, पांच तहसीलदारों, चार प्रखंड विकास अधिकारियों तथा कई अन्य सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद 41 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, जबकि 91 सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों की पेंशन बंद की गई है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2025 में ओडिशा सतर्कता विभाग की दोषसिद्धि दर 50 प्रतिशत थी, जो सितंबर 2026 तक बढ़कर 65 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में दोषसिद्धि की इस दर के कारण राज्य का सतर्कता विभाग राज्य के भीतर और बाहर सराहना प्राप्त कर रहा है।
भ्रष्टाचार रोकने के लिए तकनीक और शोध पर जोर
मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार की रोकथाम में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसके लिए ओडिशा आईटी नीति को मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि ओडिशा सतर्कता विभाग में एक ‘प्रिवेंटिव विजिलेंस रिसर्च विंग’ गठित किया जा रहा है।
इस इकाई के माध्यम से भ्रष्टाचार की आशंका वाले क्षेत्रों और उसमें संलिप्त लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
मुख्यमंत्री ने इस वर्ष के विषय ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ का उल्लेख करते हुए कहा कि मजबूत नैतिक मूल्य, पूर्ण पारदर्शिता और ईमानदारी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के सबसे महत्वपूर्ण साधन हैं। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों से अपने आचरण में ईमानदारी और निष्ठा अपनाने तथा सत्यनिष्ठा को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
उत्कृष्ट कार्य के लिए सतर्कता अधिकारियों को सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सतर्कता विभाग के अधिकारियों और इकाइयों को सम्मानित किया।
कोरापुट सतर्कता डिवीजन को सर्वश्रेष्ठ डिवीजन और अंगुल इकाई को सर्वश्रेष्ठ यूनिट का पुरस्कार दिया गया। मलकानगिरी सतर्कता के डीएसपी सदानंद पाणि को सर्वश्रेष्ठ जांच अधिकारी तथा भुवनेश्वर डिवीजन की वैभवमाला स्वाईं को सर्वश्रेष्ठ महिला जांच अधिकारी के रूप में सम्मानित किया गया। भुवनेश्वर सतर्कता विशेष न्यायालय के लोक अभियोजक सलील कुमार प्रधान को सर्वश्रेष्ठ लोक अभियोजक का पुरस्कार प्रदान किया गया।
अंतिम पंक्ति के लाभार्थी तक पहुंचना जरूरी: मुख्य सचिव
कार्यक्रम में मुख्य सचिव अनु गर्ग ने कहा कि जनता की मेहनत की कमाई से संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक ईमानदारी से पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक का उपयोग कर पारदर्शी तरीके से सेवाएं उपलब्ध करा रही है।
ओडिशा सतर्कता निदेशक यशवंत कुमार जेठवा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विभाग की उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की शून्य सहनशीलता नीति के अनुरूप सतर्कता विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ और सेवानिवृत्त अधिकारी उपस्थित रहे। सतर्कता विभाग के अतिरिक्त निदेशक असीत कुमार पाणिग्राही ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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