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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में दखल से किया इनकार
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छह माह में लाभ देने का निर्देश
नई दिल्ली/भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों को पूर्ण ग्रांट-इन-एड (जीआईए) लाभ देने संबंधी ओडिशा हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की खंडपीठ ने 25 मार्च को राज्य सरकार की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस मुद्दे पर पहले भी कई विशेष अनुमति याचिकाएं, करीब 60 से अधिक, खारिज की जा चुकी हैं, इसलिए नए किसी हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2025 को दिए अपने ऐतिहासिक निर्णय में कहा था कि जिन सहायता प्राप्त विद्यालयों, कन्या विद्यालयों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और कॉलेजों को 1994 की जीआईए योजना समाप्त होने से पहले संबंधित निदेशालयों द्वारा अनुशंसित किया गया था, उन्हें पूर्ण सहायता से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति बिरजा प्रसन्न सतपथि द्वारा दिए गए इस फैसले में 100 से अधिक अपीलों का निपटारा करते हुए शिक्षा अधिकरण के उन आदेशों को बरकरार रखा गया, जिनमें जीआईए लाभ देने की अनुशंसा की गई थी और जिन आदेशों में लाभ से इनकार किया गया था, उन्हें रद्द कर दिया गया।
1994 का जीआईए आदेश निजी सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों के योग्य शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को पूर्ण वेतन सहायता प्रदान करता था। यह आदेश 5 फरवरी 2004 को समाप्त कर दिया गया और इसके स्थान पर आंशिक (ब्लॉक) सहायता वाली व्यवस्था लागू की गई। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 1994 की योजना की समाप्ति का प्रभाव उन संस्थानों पर पीछे से लागू नहीं किया जा सकता जिनकी अनुशंसा कट-ऑफ तिथि से पहले हो चुकी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की दलीलों को पूरी तरह उचित बताते हुए कहा कि आदेश में राज्य सरकार को तथ्य जांचने और आवश्यक निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई है। लंबे समय से चल रहे इस विवाद को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह छह महीने के भीतर पूरा प्रक्रिया कार्य समाप्त कर पात्र कर्मचारियों को लाभ उपलब्ध कराए।
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