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मौत के बाद भी महिला डॉक्टर ने बचाई रोगी की जान

  •     मृत्यु के बाद दान किए गए लीवर से मिली एक को नई जिंदगी

  •     अंगदान की मिसाल बनीं डॉक्टर राधा पाढ़ी

भद्रक। ओडिशा की होम्योपैथी चिकित्सक डॉ राधा पाढ़ी मृत्यु के बाद भी किसी की जिंदगी रोशन कर गईं। उनके निधन के बाद दान किए गए लीवर से एक मरीज को नया जीवन मिला, जिससे वे अंगदान की प्रेरणादायक मिसाल बन गईं।

39 वर्षीय महिला डॉक्टर ओडिशा के भद्रक जिले की सहदेवदास पाटना (चांदबली ब्लॉक) की निवासी और होम्योपैथी चिकित्सक थीं, जीवनभर मरीजों की सेवा करती रहीं और मृत्यु के बाद भी किसी की जिंदगी बचाकर अमर हो गईं।

बचपन से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझती रहीं

डॉ राधा बचपन से ही प्लेटलेट डिसऑर्डर से पीड़ित थीं। बार-बार बीमार पड़ना और नाक से खून निकलना उनकी सामान्य स्थिति बन चुकी थी। इसके बावजूद उन्होंने अपने पेशे और मरीजों की सेवा को कभी नहीं छोड़ा।

28 मार्च को एम्स में भर्ती, बचाया न जा सका

उन्हें 28 मार्च को गंभीर हालत में एम्स भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उन्होंने शुक्रवार को अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद परिवार ने उनका लीवर दान करने का निर्णय लिया, जिससे एक अन्य व्यक्ति को जीवनदान मिला।

अंतिम संस्कार में दी गई श्रद्धांजलि

उनका अंतिम संस्कार गांव में अत्यंत भावुक वातावरण में किया गया। सम्मान के तौर पर गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, जिससे उनके योगदान को नमन किया जा सके।

परिवार ने याद किए उनके सेवाभाव

उनके दादा श्रीधर पंडा ने मीडियो को बताया कि तीन साल की उम्र से ही वह बीमार पड़ती थीं। नाक से खून निकलता था, कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं। इसके बावजूद उन्होंने लोगों की मदद करना नहीं छोड़ा। उन्होंने कैंसर मरीजों के लिए दो बार अपने बाल दान किए थे और तीसरी बार देने की योजना में थीं।

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