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ओडिशा की नई आबकारी नीति: 180 एमएल तक टेट्रा पैक में शराब, पुरी बीच पर दुकानों पर रोक

भुवनेश्वर । ओडिशा आबकारी विभाग ने शराब वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से नई दिशानिर्देश जारी किए हैं।

नई नीति के तहत अब 180 एमएल तक की शराब टेट्रा पैक में बेची जा सकेगी। ये मजबूतपेपर-आधारित पैकेजिंग पारंपरिक कांच की बोतलों की जगह लेगी। टेट्रा पैक को छह सुरक्षा परतों के साथ तैयार किया जाएगाताकि लीकेजसंदूषण और छेड़छाड़ को रोका जा सके।

अधिकारियों के अनुसारयह पहल न केवल उपभोक्ता सुरक्षा बढ़ाने के लिए हैबल्कि फेंकी गई कांच की बोतलों से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को कम करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

दिशानिर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि टेट्रा पैक बनाने वाले निर्माताओं को गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग या सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रमाणन प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत सरकार ने पुरी बीच पर शराब की दुकानों के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

हालांकिअन्य तटीय क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ओडिशा टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और इंडिया टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन   को रियायती दरों पर शराब की दुकानें संचालित करने की अनुमति दी है। इन लाइसेंस शुल्कों में 50 प्रतिशत की कमी की गई है।

इसके अलावाओडिशा टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को ईको-रिट्रीट स्थलों और निर्धारित बीच क्षेत्रों में अस्थायी लाइसेंस के तहत शराब बेचने की अनुमति दी जाएगी। ऑन रेस्टोरेंट’ श्रेणी के अंतर्गत इन आउटलेट्स के लिए वार्षिक लाइसेंस शुल्क 75,000 रुपये निर्धारित किया गया है। OTDC इन दुकानों का संचालन स्वयं कर सकता है या तीसरे पक्ष को सौंप सकता है। साथ हीबिजलीपानी और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी OTDC की होगी।

अधिकारियों का कहना है कि यह नीति पर्यावरणीय संतुलनपर्यटन को बढ़ावा देने और शराब की बिक्री को नियंत्रित करने के बीच संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

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