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महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल ने बातचीत में ठोस प्रगति न होने पर चिंता जताई
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दोनों राज्यों को ठोस और विस्तृत अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया
भुवनेश्वर। महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच बातचीत में ठोस प्रगति न होने पर चिंता जताई। ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों को अगली सुनवाई में ठोस और विस्तृत अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
28 मार्च 2026 को पारित आदेश में ट्रिब्यूनल ने कहा कि संयुक्त तकनीकी समितियों से वार्ता की स्थिति रिपोर्ट की अपेक्षा थी, लेकिन कोई भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीताम्बर आचार्य ने सौहार्दपूर्ण समाधान पर एक स्टेटस नोट जमा किया, लेकिन पीठ ने उसमें “कोई ठोस या सार्थक प्रगति” नहीं पाई।
छत्तीसगढ़ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एके गांगुली और ओडिशा की ओर से आचार्य ने आश्वासन दिया कि “राज्यों के उच्च स्तर पर चल रही वार्ता में ठोस प्रगति” अगली तारीख को प्रस्तुत की जाएगी।
ट्रिब्यूनल की तीन सदस्यीय पीठ, न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी (अध्यक्ष), डॉ न्यायमूर्ति रवि रंजन और न्यायमूर्ति इंदरमीत कौर कोचर, ने हाल ही में ओडिशा और छत्तीसगढ़ का स्थलीय निरीक्षण किया था। दौरे को काफी उपयोगी और शिक्षाप्रद बताते हुए ट्रिब्यूनल ने दो मूल्यांकनकर्ताओं और रजिस्ट्रार को एक सप्ताह के भीतर अलग-अलग तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया।
दोनों राज्यों द्वारा ट्रिब्यूनल की अवधि बढ़ाने के लिए दायर संयुक्त आवेदन को 9 फरवरी 2026 को जल शक्ति मंत्रालय को भेजा गया था, लेकिन मंत्रालय का जवाब अभी तक नहीं मिला है। मौजूदा कार्यकाल 13 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है, इसी बीच ट्रिब्यूनल ने अगली सुनवाई 11 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे तय की है।
महानदी नदी जल बंटवारे को लेकर वर्षों से विवाद जारी है। ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में बनाए जा रहे अपस्ट्रीम प्रोजेक्ट्स के कारण डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में सिंचाई और अन्य उपयोगों के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
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