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ताडेपल्लीगुडेम के रेलांगी और दुव्वा  ग्रामीणों के घरों में जाकर रोगों से बचाव के उपाय बताए गए

रेलांगी/दुव्वा, विश्व होम्योपैथी सप्ताह के सफल  शुभारंभ के बाद, एएसआर  होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एएसआरएचएमसी) ने उमर अलीशा रूरल डेवलपमेंट ट्रस्ट (यूएआरडीटी) के साथ मिलकर  गुरुवार को रेलांगी और दुव्वा में इंटेंसिव मेडिकल कैंप और जागरूकता कार्यक्रम के साथ अपनी  सामुदायिक सहायता को बढ़ाया।

ताडेपल्लीगुडेम के परियोजनात्मक स्वास्थ्य को आगे बढ़ाते हुए, शिक्षक संकाय ,इंटर्न   विद्यार्थियों ने टैंजिबल साइंस को सीधे  ग्रामीणों  के घरों तक पहुंचाया। यह पहल,  पश्चिम गोदावरी जिले में 2,000 से ज़्यादा ज़रूरतमंद लोगों को साइंटिफिक स्क्रीनिंग और राहत देने के एक बड़े मिशन का हिस्सा के तहत किया गया ।

इस अनोखे जमीनी स्तर के  कार्य  में,  विद्यार्थी दलो ने ने एक बड़ा डोर-टू-डोर  अभियान चलाया, जिसमें परिवारों को पुरानी बीमारियों के लिए होम्योपैथी के असर के बारे में बताया गया।  सामाजिक जागरूकता सत्र में इन चीज़ों पर फोकस किया गया। इसके तहत

जीवन शली  और मधुमेह जांच  की अहमियत पर ज़ोर देते हुए,  उच्च रकचाप और मोटापे से बचाव के  उपाय बताए गए। इसके साथ ही हार्मोनल और स्ट्रक्चरल हेल्थ: थायरॉइड डिसऑर्डर और बोन मिनरल की कमी  के बारे में जागरूक बनाया गया।

इंस्टीट्यूशनल सर्विसेज़:  ग्रामीणों को एएसआरएचएमसी स्पेशलिटी  बाह्य रोगी क्लीनिक, 10 पेरिफेरल  बाह्य रोगी विभाग में स्पेशल सर्विसेज़ और हॉस्पिटल में भर्ती होने की ज़रूरत वाले लोगों के लिए  निशुल्क भर्ती होने वाले रोगियों के चिकित्सा के बारे में बताया गया। इस  शिविर  का मुआयना जाने-माने क्लिनिकल  विशेषज्ञों और फैकल्टी  के सदस्यों ने किया।

दुव्वा में मेडिकल टीम को प्रोफेसर डॉ. कदली श्रीनिवास और डॉ. बी. अरुणा कुमारी ने   क्लिनिकल स्क्रीनिंग और स्टूडेंट-लेड अवेयरनेस टॉक की देखरेख की। वहीं रेलंगी में डॉ. एन. श्रीनिवास और डॉ. त्रिलोक्य ने सैकड़ों गांववालों को एक्सपर्ट सलाह दी।

उमर अलीशा रूरल डेवलपमेंट ट्रस्ट के  स्वयंसेवकों ने लॉजिस्टिक्स को ऑर्गनाइज़ करने और इन कैंपों को आसानी से चलाने में अहम भूमिका निभाई। यह मिलकर किया गया काम नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी (एनसीएच) के उस आदेश के मुताबिक है जिसके तहत होम्योपैथी को एक स्टैंडर्ड, रिसर्च पर आधारित जन स्वास्थ्य दिशा में पहल में  किया जाएगा।

जागरूकता सप्ताह और  चिकित्सा शविर आगामी 7 अप्रैल तक चलेंगे। जिसके आखिर में 10 अप्रैल को डॉ. सैमुअल हैनीमैन की 271वीं जयंती के  अवसर पर एक राष्ट्रीय सगोष्ठीऔर  पुरस्कार प्रदान कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

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