-
एम्स भुवनेश्वर में अंग प्रत्यारोपण व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर क्षेत्रीय सीएमई आयोजित
-
एआई की मदद से दानदाता खोजने से लेकर अंग पहुंचाने तक की प्रक्रिया होगी आसान
-
मरीजों को तेजी और बेहतर इलाज का लाभ मिलेगा
भुवनेश्वर। एम्स भुवनेश्वर और नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (एनएएमएस) द्वारा आयोजित क्षेत्रीय सीएमई कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ यह सामने आया कि आने वाले समय में एआई के प्रयोग से अंग प्रत्यारोपण और स्वास्थ्य सेवाएं तेज, सुरक्षित और ज्यादा प्रभावी होंगी। विशेषज्ञों ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से दानदाता और जरूरतमंद मरीज के बीच सही मिलान, अंग की रियल-टाइम ट्रैकिंग और तेज परिवहन मार्ग तय करने जैसे काम काफी आसान हो जाएंगे। इससे गंभीर मरीजों को समय पर जीवनरक्षक प्रत्यारोपण मिल सकेगा।
विश्व में अंग प्रत्यारोपण के मामले में भारत तीसरे स्थान पर
कार्यक्रम में ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के 300 से अधिक डॉक्टर शामिल हुए। उद्घाटन सत्र में पीएमओ के अतिरिक्त सचिव सुभाशीष पंडा ने कहा कि एआई अंग प्रत्यारोपण प्रणाली को पूरी तरह बदल सकता है। उन्होंने बताया कि भारत विश्व में अंग प्रत्यारोपण के मामले में तीसरे स्थान पर है और पिछले साल 20,000 प्रत्यारोपण किए गए थे, लेकिन अभी भी 82% दान जीवित दाताओं से होते हैं, जो सीमित और महंगे हैं।
एम्स भुवनेश्वर की प्रोग्रेस की तारीफ
एम्स भुवनेश्वर की प्रोग्रेस की तारीफ करते हुए सीनियर ब्यूरोक्रेट पंडा ने बताया कि जहां भुवनेश्वर में कोई अच्छा हेल्थकेयर सेंटर नहीं था, वहां हमने सबसे पहले भारत सरकार से मंजूर एम्स बनवाया और यह एम्स दिल्ली के साथ देश के जाने-माने एम्स में से एक बन गया है।
एम्स में अंग प्रत्यारोपण और एआई का क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित
एम्स भुवनेश्वर के कार्यकारी निदेशक प्रो (डॉ) अशुतोष विश्वास ने घोषणा की कि संस्थान जल्द ही अंग प्रत्यारोपण और एआई का क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करेगा। आशुतोष विश्वास ने दानदाताओं के समूह का विस्तार करने, संस्थागत तैयारी को मजबूत करने और राष्ट्रीय नीति रणनीतियों के साथ संरेखित करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया।
देश में हर साल करीब 5 लाख अंगों की जरूरत
एनएएमएस के अध्यक्ष डॉ दिगंबर बेहरा ने बताया कि देश में हर साल करीब 5 लाख अंगों की जरूरत होती है, जबकि केवल 3% मांग ही पूरी हो पाती है। 82,000 से ज्यादा मरीज वर्तमान में प्रतीक्षा सूची में हैं। कार्यक्रम में एम्स, आईआईटी, पीजीआईएमईआर, नाइजर, आईजीआईएमएस सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
पूरे दिन चली इस सीएमई में कानूनी-नीतिगत चुनौतियों, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, अंग दान बढ़ाने की रणनीतियों और स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई।
बेहतर प्रत्यारोपण परिणामों के लिए आपसी सहयोग पर जोर
सीएमई का समापन इस आम सहमति के साथ हुआ कि पूरे भारत में अंग प्रत्यारोपण के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए आपसी सहयोग के प्रयासों को सुदृढ़ किया जाए, जागरूकता बढ़ाई जाए और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रभावी उपयोग किया जाए। सीएमई के आयोजन सचिव डॉ भागीरथी द्विवेदी ने इस अवसर पर धन्यवाद प्रस्ताव दिया।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
